रायपुर, 17 जुलाई 2026। छत्तीसगढ़ के स्कूल शिक्षा विभाग में प्रतिनियुक्ति (डेपुटेशन) का मुद्दा एक बार फिर सुर्खियों में है। एक ओर विभाग प्रतिनियुक्ति समाप्त करने के लिए लगातार सख्त निर्देश जारी कर रहा है, वहीं दूसरी ओर हाल ही में एक शिक्षक की नई प्रतिनियुक्ति का आदेश जारी होने से विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठने लगे हैं।
15 जुलाई को जारी हुआ नया आदेश
स्कूल शिक्षा विभाग, मंत्रालय महानदी भवन, नवा रायपुर द्वारा 15 जुलाई 2026 को जारी आदेश के अनुसार, गोपाल सिंह वर्मा, शिक्षक, शासकीय हाई स्कूल अर्जुनी, विकासखंड बलौदाबाजार को उनकी वर्तमान पदस्थापना से हटाकर विकासखंड शिक्षा स्रोत समन्वयक (BRC कार्यालय), विकासखंड शिक्षा कार्यालय, बलौदाबाजार में आगामी आदेश तक अस्थायी रूप से पदस्थ किया गया है।
आदेश में स्पष्ट रूप से उल्लेख किया गया है कि यह पदस्थापना राज्य शासन के निर्देशों के तहत तत्काल प्रभाव से की गई है।
सख्ती के बीच नया आदेश, उठे कई सवाल
यह आदेश ऐसे समय में सामने आया है, जब शिक्षा विभाग पूरे प्रदेश में प्रतिनियुक्त शिक्षकों को उनके मूल विद्यालयों में लौटने के निर्देश दे रहा है। विभाग ने चेतावनी भी दी है कि निर्धारित समय तक वापसी नहीं करने वाले शिक्षकों का जुलाई माह का वेतन रोका जा सकता है और ब्रेक इन सर्विस जैसी कार्रवाई भी की जा सकती है।
ऐसे में नया प्रतिनियुक्ति आदेश कई सवाल खड़े कर रहा है—
- जब प्रतिनियुक्ति व्यवस्था समाप्त की जा रही है, तो नए आदेश क्यों जारी किए जा रहे हैं?
- क्या कुछ पद ऐसे हैं, जहां प्रशासनिक कारणों से प्रतिनियुक्ति अनिवार्य मानी जा रही है?
- या फिर कुछ मामलों में विभाग अलग मानदंड अपना रहा है?
शिक्षकों में बढ़ सकती है नाराजगी
प्रदेशभर के हजारों शिक्षक पहले से ही प्रतिनियुक्ति समाप्त करने के आदेश और VSK ऐप आधारित उपस्थिति व्यवस्था को लेकर असंतोष जता चुके हैं। ऐसे में एक ओर सख्ती और दूसरी ओर नए प्रतिनियुक्ति आदेश से शिक्षकों के बीच असमानता और दोहरे मानदंड को लेकर चर्चा तेज होने की संभावना है।
स्पष्ट नीति की उठी मांग
शिक्षा जगत से जुड़े लोगों का कहना है कि यदि सरकार वास्तव में प्रतिनियुक्ति व्यवस्था समाप्त करना चाहती है, तो यह नीति सभी पर समान रूप से लागू होनी चाहिए। वहीं यदि प्रशासनिक आवश्यकता के चलते कुछ पदों पर प्रतिनियुक्ति आवश्यक है, तो विभाग को इसके लिए स्पष्ट नीति, नियम और कारण सार्वजनिक करने चाहिए, ताकि शिक्षकों के बीच किसी प्रकार का भ्रम न रहे।
फिलहाल, इस नए आदेश ने शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली और प्रतिनियुक्ति नीति को लेकर नई बहस छेड़ दी है। अब सवाल यही है कि क्या प्रतिनियुक्ति व्यवस्था वास्तव में खत्म हो रही है, या फिर चुनिंदा मामलों में इसे अब भी जारी रखा जाएगा?





