नरहरपुर, 28 जून। एक ओर देश में डिजिटल इंडिया अभियान के तहत इंटरनेट और मोबाइल कनेक्टिविटी को गांव-गांव तक पहुंचाने के दावे किए जा रहे हैं, वहीं छत्तीसगढ़ के कांकेर जिले के नरहरपुर विकासखंड का दबेना गांव आज भी मोबाइल नेटवर्क जैसी बुनियादी सुविधा के लिए संघर्ष कर रहा है। करीब एक हजार से अधिक आबादी वाले इस गांव में हालात ऐसे हैं कि ग्रामीणों को मोबाइल पर बात करने के लिए मकानों की छतों, पेड़ों और हाईमास्ट लाइट के पोल पर चढ़ना पड़ता है।
ग्रामीणों का कहना है कि गांव में मोबाइल नेटवर्क बेहद कमजोर है। कई बार जरूरी फोन कॉल करने या प्राप्त करने के लिए लोगों को ऊंचे स्थानों पर जाना पड़ता है। बरसात और रात के समय यह परेशानी और भी बढ़ जाती है। आपातकालीन परिस्थितियों में भी समय पर संपर्क नहीं हो पाने से लोगों को गंभीर दिक्कतों का सामना करना पड़ता है।
दबेना गांव राजनीतिक दृष्टि से भी काफी महत्वपूर्ण माना जाता है। यह गांव देश के पूर्व केंद्रीय मंत्री और चार बार सांसद रहे स्वर्गीय अरविंद नेताम तथा पूर्व वन मंत्री शिव नेताम का पैतृक गांव रहा है। प्रदेश और राष्ट्रीय राजनीति में महत्वपूर्ण योगदान देने वाले नेताओं का गांव होने के बावजूद यहां आज तक मोबाइल नेटवर्क की स्थायी व्यवस्था नहीं हो सकी है।
ग्रामीणों का कहना है कि उन्होंने कई बार प्रशासन और जनप्रतिनिधियों के समक्ष मोबाइल टावर स्थापित करने की मांग उठाई, लेकिन अब तक कोई ठोस समाधान नहीं निकला। उनका कहना है कि डिजिटल सेवाओं, ऑनलाइन पढ़ाई, बैंकिंग, सरकारी योजनाओं और स्वास्थ्य सुविधाओं का लाभ भी कमजोर नेटवर्क के कारण पूरी तरह नहीं मिल पा रहा है।
गांव के विद्यार्थियों को ऑनलाइन पढ़ाई और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी में भी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। वहीं किसानों और आम नागरिकों को सरकारी पोर्टल, बैंकिंग सेवाओं और अन्य डिजिटल सुविधाओं का उपयोग करने में भी परेशानी होती है।
ग्रामीणों ने शासन और दूरसंचार विभाग से जल्द से जल्द गांव में मोबाइल टावर स्थापित कर बेहतर नेटवर्क सुविधा उपलब्ध कराने की मांग की है। उनका कहना है कि डिजिटल युग में भी यदि मोबाइल नेटवर्क जैसी मूलभूत सुविधा उपलब्ध नहीं होगी, तो विकास के दावे अधूरे ही रह जाएंगे।





