रायपुर। करीब 20 हजार करोड़ रुपये की लागत से बन रहे रायपुर-विशाखापट्टनम एक्सप्रेस-वे की गुणवत्ता को लेकर सवाल उठने लगे हैं। उद्घाटन से पहले ही सड़क के कुछ हिस्सों में दरारें दिखाई देने का दावा किया गया है। इसे लेकर छत्तीसगढ़ कांग्रेस ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर तस्वीरें साझा करते हुए भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए हैं। कांग्रेस ने तंज कसते हुए कहा कि "फीता कटने से पहले ही सड़क फट गई, यही है विकास का मॉडल?"


कांग्रेस ने सोशल मीडिया पर साधा निशाना

छत्तीसगढ़ कांग्रेस ने अपने आधिकारिक एक्स अकाउंट पर सड़क की कथित तस्वीरें साझा करते हुए लिखा कि विकास का ऐसा उदाहरण शायद ही पहले कभी देखने को मिला हो। पोस्ट में कहा गया कि करोड़ों रुपये की लागत से तैयार किया जा रहा राष्ट्रीय राजमार्ग उद्घाटन से पहले ही दरारों का शिकार हो गया। कांग्रेस ने आरोप लगाया कि निर्माण कार्य की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं और इसकी निष्पक्ष जांच कराई जानी चाहिए।


464 किलोमीटर लंबा होगा एक्सप्रेस-वे

भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) द्वारा रायपुर से विशाखापट्टनम तक लगभग 464 किलोमीटर लंबे छह-लेन एक्सप्रेस-वे का निर्माण कराया जा रहा है। यह परियोजना देश की महत्वाकांक्षी भारतमाला परियोजना के तहत विकसित की जा रही है। इस कॉरिडोर के पूरा होने के बाद छत्तीसगढ़, ओडिशा और आंध्र प्रदेश के बीच सड़क संपर्क पहले से कहीं अधिक तेज और सुगम हो जाएगा।


कई प्रमुख शहरों को मिलेगा सीधा लाभ

यह एक्सप्रेस-वे रायपुर, धमतरी, कांकेर, कोंडागांव, कोरापुट और सब्बावरम जैसे प्रमुख शहरों को सीधे विशाखापट्टनम बंदरगाह से जोड़ेगा। माना जा रहा है कि इससे माल परिवहन की लागत कम होगी, यात्रा का समय घटेगा और औद्योगिक एवं व्यापारिक गतिविधियों को नई गति मिलेगी। साथ ही छत्तीसगढ़ के आर्थिक विकास को भी बड़ा बल मिलने की उम्मीद है।


तीन राज्यों से होकर गुजरेगा इकोनॉमिक कॉरिडोर

यह ग्रीनफील्ड एक्सप्रेस-वे तीन राज्यों से होकर गुजरेगा। इसमें छत्तीसगढ़ में 124.611 किलोमीटर, ओडिशा में 262.211 किलोमीटर और आंध्र प्रदेश में 99.629 किलोमीटर सड़क का निर्माण किया जा रहा है। परियोजना के तहत दो बड़ी सुरंगें भी बनाई जाएंगी, जो इस कॉरिडोर की प्रमुख विशेषताओं में शामिल हैं।


छत्तीसगढ़ में बनेंगे पांच जंक्शन

एक्सप्रेस-वे पर छत्तीसगढ़ में कुल पांच आधुनिक जंक्शन विकसित किए जाएंगे, जहां से वाहनों के प्रवेश और निकास की सुविधा मिलेगी। इसके अलावा इस परियोजना में क्लोज्ड टोलिंग सिस्टम लागू किया जाएगा, जिसके तहत यात्रियों से केवल उतनी ही दूरी का टोल वसूला जाएगा, जितनी दूरी तक वे एक्सप्रेस-वे का उपयोग करेंगे।


गुणवत्ता को लेकर उठे सवाल

सड़क में दरारों के दावों के बाद परियोजना की गुणवत्ता को लेकर राजनीतिक बहस तेज हो गई है। कांग्रेस ने पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच कराने और निर्माण एजेंसी की जवाबदेही तय करने की मांग की है। वहीं, इस संबंध में NHAI की ओर से आधिकारिक प्रतिक्रिया का इंतजार किया जा रहा है।