रायपुर/बिलासपुर। छत्तीसगढ़ चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्रीज की कार्यकारिणी बैठक से पहले संगठन के भीतर विवाद सामने आया है। चैंबर के बिलासपुर संभाग कार्यकारी अध्यक्ष एवं संविधान संशोधन समिति के सदस्य कमल सोनी ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। उन्होंने चैंबर की कार्यप्रणाली और संविधान में क्षेत्रीय प्रतिनिधित्व को लेकर सवाल उठाए हैं।
कमल सोनी का आरोप है कि 9 अगस्त को होने वाली कार्यकारिणी बैठक के एजेंडे से संविधान संशोधन और बिलासपुर के व्यापारियों के हितों से जुड़े महत्वपूर्ण विषयों को हटा दिया गया। उन्होंने इसे प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों के व्यापारियों के समान प्रतिनिधित्व से जुड़ा गंभीर विषय बताया।
संविधान की धारा 15 पर उठाए सवाल
कमल सोनी ने चैंबर के संविधान की धारा 15 में मौजूद व्यवस्था पर भी आपत्ति जताई है। उनका कहना है कि अध्यक्ष, महामंत्री और कोषाध्यक्ष जैसे प्रमुख पदों के लिए पात्रता मुख्य रूप से रायपुर और नया रायपुर क्षेत्र तक सीमित होने के कारण प्रदेश के अन्य संभागों के व्यापारियों को समान अवसर और प्रतिनिधित्व नहीं मिल पा रहा है।
उन्होंने चैंबर की व्यवस्था में बदलाव करते हुए प्रदेश के सभी क्षेत्रों के व्यापारियों को समान भागीदारी देने की मांग की है।
बिलासपुर को SCR में शामिल करने की मांग
कमल सोनी ने बिलासपुर को राज्य राजधानी क्षेत्र (SCR) में शामिल करने की मांग भी उठाई। इसके साथ ही उन्होंने बिलासपुर में औद्योगिक पार्क स्थापित करने और प्रदेश में मौजूद क्षेत्रीय औद्योगिक असंतुलन को दूर करने की आवश्यकता बताई।
सोनी का दावा है कि बिलासपुर समेत प्रदेश के अन्य संभागों को औद्योगिक विकास में अपेक्षित प्राथमिकता नहीं मिलने के कारण पिछले कुछ वर्षों में कई उद्योगों का पलायन हुआ है। उन्होंने क्षेत्रीय स्तर पर उद्योग और व्यापार को बढ़ावा देने के लिए ठोस कदम उठाने की मांग की है।
'पद छोड़ा है, व्यापारियों की आवाज उठाता रहूंगा'
कमल सोनी ने स्पष्ट किया कि उनका इस्तीफा किसी व्यक्ति अथवा क्षेत्र के विरोध में नहीं है। उन्होंने कहा कि उन्होंने अपना पद जरूर छोड़ दिया है, लेकिन पूरे छत्तीसगढ़ के व्यापारियों के अधिकार और समान प्रतिनिधित्व के लिए आवाज उठाना जारी रखेंगे।
चैंबर की कार्यकारिणी बैठक से ठीक पहले आए इस इस्तीफे के बाद संगठन के भीतर संविधान संशोधन और क्षेत्रीय प्रतिनिधित्व का मुद्दा चर्चा में आ गया है। अब सभी की नजरें कार्यकारिणी बैठक और चैंबर नेतृत्व के रुख पर टिकी हैं।





