रायपुर। छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग की राज्य सेवा परीक्षा-2021 के चयनित अभ्यर्थियों को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत मिली है। शीर्ष अदालत ने छत्तीसगढ़ सरकार की ओर से दाखिल विशेष अनुमति याचिका (SLP) खारिज कर दी है। इसके साथ ही हाईकोर्ट के उस आदेश में हस्तक्षेप नहीं किया गया, जिसमें CBI जांच में प्रतिकूल तथ्य नहीं पाए गए चयनित अभ्यर्थियों को सशर्त नियुक्ति देने के निर्देश दिए गए थे।
सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले के बाद उन चयनित अभ्यर्थियों की नियुक्ति का रास्ता साफ माना जा रहा है, जो CBI की चार्जशीट या जांच में सामने आए आरोपों के दायरे में नहीं हैं।
171 पदों के लिए हुई थी राज्य सेवा परीक्षा-2021
CGPSC ने वर्ष 2021 में राज्य सेवा परीक्षा के माध्यम से 171 पदों पर भर्ती के लिए विज्ञापन जारी किया था। इसमें डिप्टी कलेक्टर, DSP, नायब तहसीलदार और जेल अधीक्षक समेत विभिन्न सेवाओं के पद शामिल थे।
प्रारंभिक और मुख्य परीक्षा के बाद इंटरव्यू की प्रक्रिया पूरी की गई और 11 मई 2023 को अंतिम चयन सूची जारी हुई। हालांकि, इसके बाद भर्ती प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं और भाई-भतीजावाद के आरोपों ने पूरे मामले को विवादों में ला दिया।
भर्ती में कथित गड़बड़ियों को लेकर पहुंचा था मामला हाईकोर्ट
भर्ती प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए पूर्व मंत्री ननकी राम कंवर ने बिलासपुर हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर की थी। इसमें नेताओं, अधिकारियों और आयोग से जुड़े लोगों के करीबियों को कथित रूप से अनुचित लाभ दिए जाने जैसे आरोप लगाए गए थे।
बाद में मामले की जांच CBI को सौंप दी गई, जिसके चलते चयन सूची में शामिल कई अभ्यर्थियों की नियुक्तियां प्रभावित हुईं।
नियुक्ति नहीं मिलने पर चयनित अभ्यर्थियों ने खटखटाया कोर्ट का दरवाजा
CBI जांच के बीच कुछ पदों पर नियुक्तियां हुईं, लेकिन डिप्टी कलेक्टर और DSP समेत विभिन्न पदों पर चयनित कई अभ्यर्थियों को नियुक्ति नहीं मिल सकी।
इसके बाद राणा विजय, अमित कुमार भारद्वाज और प्रज्ञा नायक समेत अन्य चयनित अभ्यर्थियों ने नियुक्ति की मांग को लेकर हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की।
हाईकोर्ट ने कहा- सभी चयनित अभ्यर्थियों को एक नजर से नहीं देखा जा सकता
सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने CBI की जांच प्रगति से संबंधित रिपोर्ट पर विचार किया। इसके बाद अदालत ने माना कि जिन अभ्यर्थियों के खिलाफ कोई ठोस प्रतिकूल सामग्री नहीं है, उन्हें पूरी भर्ती प्रक्रिया पर लगे आरोपों के आधार पर नियुक्ति से वंचित नहीं रखा जा सकता।
सिंगल बेंच ने सरकार को CBI की चार्जशीट के दायरे से बाहर चयनित अभ्यर्थियों को 60 दिनों के भीतर सशर्त नियुक्ति पत्र देने का निर्देश दिया था।
नियुक्ति पर लागू रहेगी महत्वपूर्ण शर्त
हाईकोर्ट ने नियुक्तियों को जांच के अंतिम परिणाम के अधीन रखा था। यानी भविष्य में जांच के दौरान किसी चयनित अभ्यर्थी के खिलाफ गंभीर प्रतिकूल तथ्य सामने आते हैं तो नियमानुसार उसकी सेवा पर कार्रवाई की जा सकेगी।
इस तरह नियुक्ति मिलने का अर्थ संबंधित अभ्यर्थी को जांच से पूरी तरह मुक्त कर देना नहीं होगा।
डिवीजन बेंच से भी सरकार को नहीं मिली राहत
सिंगल बेंच के आदेश के खिलाफ राज्य सरकार ने हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच में अपील की। चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस बीडी गुरु की पीठ ने सरकार की अपील खारिज करते हुए पहले के आदेश को बरकरार रखा।
इसके बाद राज्य सरकार ने सुप्रीम कोर्ट का रुख करते हुए हाईकोर्ट के फैसले को चुनौती दी।
सुप्रीम कोर्ट ने खारिज की सरकार की SLP
मामले की सुनवाई सुप्रीम कोर्ट में जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की पीठ के समक्ष हुई। अदालत ने हाईकोर्ट के आदेश में हस्तक्षेप करने से इनकार करते हुए राज्य सरकार की SLP खारिज कर दी।
इसके बाद हाईकोर्ट के सशर्त नियुक्ति संबंधी आदेश का रास्ता साफ हो गया है।
किन चयनित अभ्यर्थियों को मिलेगा फायदा?
फैसले का लाभ मुख्य रूप से उन चयनित अभ्यर्थियों को मिलेगा, जिनके खिलाफ CBI जांच में कोई प्रतिकूल तथ्य सामने नहीं आया है और जो चार्जशीट के दायरे से बाहर हैं।
हालांकि, इसका अर्थ यह नहीं है कि सभी 171 चयनित अभ्यर्थियों को स्वतः नियुक्ति मिल जाएगी। जिन अभ्यर्थियों के खिलाफ जांच या चार्जशीट से जुड़े मामले हैं, उनकी स्थिति संबंधित न्यायिक आदेशों और जांच के परिणाम के अनुसार तय होगी।





