बिलासपुर। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने राज्य में लंबित क्लोजर रिपोर्टों को लेकर गंभीर रुख अपनाया है। अदालत ने पुलिस जांच पूरी होने के बावजूद बड़ी संख्या में क्लोजर रिपोर्ट न्यायालयों में प्रस्तुत नहीं किए जाने पर नाराजगी जताते हुए पुलिस महानिदेशक (DGP) को ताजा स्थिति बताने वाला नया शपथपत्र (एफिडेविट) दाखिल करने का निर्देश दिया है।

मुख्य न्यायाधीश रमेश सिन्हा और न्यायमूर्ति रविंद्र कुमार अग्रवाल की खंडपीठ एक याचिका पर सुनवाई कर रही थी। सुनवाई के दौरान डीजीपी की ओर से प्रस्तुत शपथपत्र में बताया गया कि 16 जुलाई 2026 तक प्रदेश में 1,45,097 ऐसे आपराधिक प्रकरण लंबित हैं, जिनमें पुलिस जांच पूरी हो चुकी है, लेकिन संबंधित न्यायालयों में क्लोजर रिपोर्ट दाखिल नहीं की गई है। इससे पहले 20 मई 2026 तक ऐसे मामलों की संख्या 1,47,714 थी। यानी इस अवधि में 2,617 मामलों में क्लोजर रिपोर्ट प्रस्तुत की गई, फिर भी लंबित मामलों की संख्या अभी भी काफी अधिक है।

अदालत ने माना कि लंबित मामलों में कुछ कमी जरूर आई है, लेकिन स्थिति अब भी चिंताजनक है। इसलिए डीजीपी को निर्देश दिया गया है कि अगली सुनवाई से पहले राज्यभर के लंबित मामलों की अद्यतन जानकारी के साथ नया शपथपत्र प्रस्तुत करें।

शपथपत्र में यह भी बताया गया कि पुलिस आयुक्त रायपुर, संबंधित रेंज के पुलिस महानिरीक्षकों (IG) और सभी जिला पुलिस अधीक्षकों (SP) को निर्देश जारी किए गए हैं कि जांच पूरी होने के बाद चार्जशीट अथवा क्लोजर रिपोर्ट समय पर न्यायालय में प्रस्तुत की जाए और इसकी नियमित निगरानी सुनिश्चित की जाए।

मामले की अगली सुनवाई 18 अगस्त 2026 को निर्धारित की गई है, जहां हाईकोर्ट लंबित क्लोजर रिपोर्टों की ताजा स्थिति की समीक्षा करेगा।