बीजापुर। जिले के रूद्रारम स्थित एकलव्य आदर्श आवासीय विद्यालय में छात्राओं के साथ कथित यौन दुर्व्यवहार का मामला गंभीर होता जा रहा है। आरोपों के घेरे में आए कंप्यूटर साइंस शिक्षक देवेंद्र दहिया की नियुक्ति, विद्यालय में उसकी भूमिका और छात्राओं के संपर्क में आने के तरीकों की जांच की जा रही है। वहीं सर्व आदिवासी समाज ने आरोपी शिक्षक की तत्काल गिरफ्तारी के साथ ही विद्यालय के प्राचार्य और विशेष निगरानी समिति की भूमिका की भी जांच कर कार्रवाई की मांग की है।
जून 2024 में हुई थी नियुक्ति
जानकारी के अनुसार, देवेंद्र दहिया की नियुक्ति जून 2024 में रूद्रारम स्थित एकलव्य आदर्श आवासीय विद्यालय में कंप्यूटर साइंस शिक्षक के रूप में हुई थी। उसकी जिम्मेदारी छात्राओं को कंप्यूटर विषय पढ़ाने की थी।
मामला सामने आने के बाद अब जांच एजेंसियां उसकी नियुक्ति से जुड़े दस्तावेजों के साथ विद्यालय में उसकी गतिविधियों, छात्राओं से संपर्क और अन्य परिस्थितियों की भी पड़ताल कर रही हैं।
छोटे समूह में छात्राओं को बुलाने की बात
विद्यालय से जुड़े एक शिक्षक के अनुसार, देवेंद्र दहिया कंप्यूटर पढ़ाने के नाम पर कई बार छात्राओं को छोटे समूहों में बुलाता था। बताया गया कि एक समय में दो से तीन छात्राओं को कंप्यूटर सिखाने के लिए अलग से बुलाया जाता था।
हालांकि, यह जानकारी फिलहाल जांच के दायरे में है। आरोपों की वास्तविक स्थिति पुलिस जांच, छात्राओं के बयान और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर ही स्पष्ट होगी।
सर्व आदिवासी समाज ने उठाई गिरफ्तारी की मांग
मामले को लेकर अब सर्व आदिवासी समाज भी सामने आया है। समाज के जिला अध्यक्ष जग्गूराम तेलामी ने आरोपी शिक्षक की तत्काल गिरफ्तारी की मांग की है।
उन्होंने विद्यालय के प्राचार्य और विशेष निगरानी समिति के सदस्यों की भूमिका की भी जांच कराने की मांग की है। तेलामी का कहना है कि यदि किसी स्तर पर शिकायतों की अनदेखी की गई है, तो जिम्मेदार लोगों पर भी आपराधिक कार्रवाई होनी चाहिए।
2024-25 से शिकायतों का दावा
जग्गूराम तेलामी ने दावा किया है कि छात्राओं और उनके परिजनों के अनुसार वर्ष 2024-25 से ही आपत्तिजनक स्पर्श से जुड़ी शिकायतें विद्यालय प्रबंधन तक पहुंच रही थीं।
उन्होंने आरोप लगाया कि इन शिकायतों को गंभीरता से नहीं लिया गया और मामले को दबाने की कोशिश की गई। हालांकि, इन आरोपों की पुष्टि जांच पूरी होने के बाद ही हो सकेगी।
प्राचार्य और निगरानी समिति की भूमिका पर सवाल
सर्व आदिवासी समाज का कहना है कि छात्राओं की सुरक्षा से जुड़े मामले में किसी भी प्रकार की लापरवाही को नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए।
समाज ने मांग की है कि यदि शिकायत मिलने के बावजूद कार्रवाई नहीं किए जाने के आरोप सही पाए जाते हैं, तो विद्यालय प्रबंधन, प्राचार्य और निगरानी व्यवस्था से जुड़े जिम्मेदार लोगों की भूमिका की निष्पक्ष जांच की जाए।
सात दिन में कार्रवाई नहीं हुई तो आंदोलन की चेतावनी
सर्व आदिवासी समाज के जिला अध्यक्ष जग्गूराम तेलामी ने चेतावनी दी है कि यदि सात दिनों के भीतर प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई, तो संगठन आंदोलन का रास्ता अपना सकता है।
उन्होंने बस्तर संभाग बंद, लोकतांत्रिक आंदोलन और सरकारी कार्यक्रमों के बहिष्कार जैसे कदमों पर विचार करने की बात कही है।
इसके साथ ही समाज ने बस्तर क्षेत्र में संचालित आदिवासी आश्रमों और छात्रावासों की व्यवस्थाओं पर भी सवाल उठाए हैं। आरोप लगाया गया है कि छात्र-छात्राओं की सुरक्षा और निगरानी व्यवस्था को मजबूत करने के बजाय प्रशासनिक स्तर पर दूसरी गतिविधियों को अधिक प्राथमिकता दी जा रही है।
फिलहाल मामले की जांच जारी है। छात्राओं की सुरक्षा, आरोपी शिक्षक की भूमिका और विद्यालय प्रबंधन की जिम्मेदारी से जुड़े सभी पहलुओं की पड़ताल के बाद ही पूरे घटनाक्रम की तस्वीर साफ हो सकेगी।




