बलौदाबाजार। छत्तीसगढ़ के बलौदाबाजार में करोड़ों रुपये के बैंक लोन घोटाले को लेकर केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) और आयकर विभाग (IT) ने बड़ी कार्रवाई की है। यूनियन बैंक ऑफ इंडिया की शिकायत पर दर्ज एफआईआर के आधार पर ₹11.38 करोड़ के बैंक लोन घोटाले की जांच शुरू की गई है। इस मामले में धमतरी स्थित केपेक्स प्राइवेट लिमिटेड, उसके निदेशकों, गारंटरों और कुछ अज्ञात बैंक अधिकारियों को आरोपी बनाया गया है।


कारोबारी के ठिकानों पर 24 घंटे चली कार्रवाई

जांच एजेंसियों ने बलौदाबाजार के एक कारोबारी के ठिकानों पर करीब 24 घंटे तक तलाशी अभियान चलाया। कार्रवाई के दौरान केंद्रीय एजेंसियों की टीम ने कई महत्वपूर्ण दस्तावेज और वित्तीय रिकॉर्ड खंगाले। इस कार्रवाई से पूरे इलाके में हलचल मच गई।


क्या है पूरा मामला?

जांच के अनुसार, 19 अप्रैल 2023 को कंपनी को ₹15 करोड़ की एक्सपोर्ट पैकिंग क्रेडिट (EPC) सुविधा स्वीकृत की गई थी। इसके अलावा कैश क्रेडिट (CC) और लेटर ऑफ क्रेडिट (LC) की सुविधाएं भी उपलब्ध कराई गई थीं। आरोप है कि कंपनी ने इन बैंक सुविधाओं का निर्धारित उद्देश्य के बजाय दुरुपयोग किया और राशि को अन्य संबद्ध कंपनियों के खातों में स्थानांतरित कर दिया।


सिस्टर कंपनियों के जरिए धन के दुरुपयोग का आरोप

CBI की प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि कंपनी ने कथित रूप से अपनी सहयोगी फर्मों के माध्यम से राशि का लेन-देन कर बैंक को गुमराह किया। आरोप है कि कैश क्रेडिट खाते से निकाली गई रकम को अलग-अलग खातों में घुमाकर उसी दिन पैकिंग क्रेडिट खाते में जमा किया गया, जिससे भुगतान होने का आभास कराया जा सके।


NPA बनने के बाद खुला मामला

बैंक के अनुसार, कंपनी समय पर ऋण नहीं चुका सकी, जिसके बाद 12 अक्टूबर 2024 को उसका ऋण खाता एनपीए (Non-Performing Asset) घोषित कर दिया गया। 31 जनवरी 2026 तक बैंक का कुल बकाया ₹11.38 करोड़ हो गया। इसके बाद बैंक ने शिकायत दर्ज कराई, जिसके आधार पर CBI ने मामला दर्ज किया।


किन पर दर्ज हुई एफआईआर?

CBI ने धमतरी केपेक्स प्राइवेट लिमिटेड, कंपनी की निदेशक राजलक्ष्मी सराफ, अभिषेक गुप्ता, गारंटर कुशल सोनी, कुछ अज्ञात बैंक अधिकारियों और अन्य अज्ञात व्यक्तियों के खिलाफ मामला दर्ज किया है। आरोपियों पर आपराधिक साजिश, धोखाधड़ी, आपराधिक न्यासभंग, लेखा में हेराफेरी और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की संबंधित धाराओं के तहत कार्रवाई की जा रही है।


जांच जारी

CBI का कहना है कि मामले में वित्तीय लेन-देन, संबंधित कंपनियों और बैंक अधिकारियों की भूमिका की गहन जांच की जा रही है। जांच के दौरान नए तथ्य सामने आने पर आगे और कार्रवाई तथा अतिरिक्त आरोपियों के खिलाफ भी कदम उठाए जा सकते हैं।