कोरबा। जिले में साइबर ठगी का एक नया तरीका सामने आया है। एक अधिवक्ता के व्हाट्सऐप नंबर पर RTO चालान के नाम से संदिग्ध APK फाइल भेजी गई और उसे डाउनलोड करने के लिए कहा गया। अधिवक्ता धनेश कुमार सिंह ने सतर्कता दिखाते हुए फाइल डाउनलोड नहीं की और मामले की शिकायत पुलिस अधीक्षक से की।


परिचित के नाम से सेव नंबर से आया मैसेज

अधिवक्ता के अनुसार, जिस नंबर से व्हाट्सऐप संदेश आया, वह उनके मोबाइल में पहले से एक परिचित के नाम से सेव था। संदेश में दावा किया गया कि भेजी गई फाइल RTO चालान की जानकारी से संबंधित है। लेकिन APK फाइल देखकर उन्हें संदेह हुआ और उन्होंने उसे डाउनलोड करने से इनकार कर दिया।


मोबाइल नंबर के दुरुपयोग या हैक होने की आशंका

अधिवक्ता ने आशंका जताई कि संबंधित व्यक्ति के मोबाइल नंबर का अनधिकृत इस्तेमाल किया गया हो सकता है या उसका मोबाइल हैक हुआ हो। उन्होंने पुलिस अधीक्षक से मोबाइल नंबर और भेजी गई APK फाइल की तकनीकी जांच कराने तथा इसके पीछे मौजूद व्यक्ति की पहचान कर कार्रवाई की मांग की है।


APK फाइल से मोबाइल डेटा चोरी होने का खतरा

साइबर विशेषज्ञों के अनुसार, APK फाइल का इस्तेमाल एंड्रॉयड फोन में एप्लीकेशन इंस्टॉल करने के लिए किया जाता है। यदि कोई व्यक्ति संदिग्ध APK डाउनलोड कर उसे मोबाइल की जरूरी अनुमतियां दे देता है, तो ठग संदेश, संपर्क सूची, निजी डेटा और अन्य जानकारियों तक पहुंच बनाने की कोशिश कर सकते हैं। बैंकिंग संबंधी जानकारी तक पहुंच मिलने पर आर्थिक नुकसान का खतरा भी बढ़ सकता है।


चालान के अलावा कई बहानों से भेजे जा रहे संदिग्ध लिंक

साइबर ठग केवल RTO चालान ही नहीं, बल्कि शादी का कार्ड, सरकारी योजना, बैंक KYC, बिजली बिल, पार्सल, नौकरी और लोन के नाम पर भी संदिग्ध लिंक और APK फाइल भेज रहे हैं। ऐसे संदेशों में अक्सर तुरंत कार्रवाई करने का दबाव बनाया जाता है, ताकि व्यक्ति बिना जांच किए फाइल डाउनलोड कर ले।


पुलिस ने सतर्क रहने की अपील की

अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक लखन पटले ने लोगों से अनजान लिंक और संदिग्ध फाइल डाउनलोड न करने की अपील की है। पुलिस ने कहा है कि RTO चालान, बैंक, KYC, बिजली बिल या किसी अन्य सेवा के नाम पर आने वाली APK फाइल की पहले सत्यता जांचें। किसी भी संदिग्ध गतिविधि की जानकारी तत्काल पुलिस या साइबर सेल को दें।