बिलासपुर। व्यापार विहार की बड़ी पार्किंग से एक्टिवा चोरी करने वाले आरोपी को तारबाहर पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। पुलिस ने एफआईआर दर्ज होने के 24 घंटे के भीतर आरोपी को पकड़कर उसके कब्जे से चोरी की एक्टिवा बरामद कर ली। आरोपी को न्यायालय में पेश किया गया, जहां से उसे न्यायिक रिमांड पर भेज दिया गया है।
पुलिस के मुताबिक, श्रीचंद भाभानी व्यापार विहार में कृष्णा ट्रेडिंग के नाम से किराना दुकान चलाते हैं। 20 अगस्त 2026 की सुबह करीब 10:30 बजे वे अपनी एक्टिवा से दुकान पहुंचे और वाहन को व्यापार विहार स्थित बड़ी पार्किंग में खड़ा कर दुकान चले गए। दोपहर करीब एक बजे वापस पार्किंग पहुंचे तो एक्टिवा गायब थी।
आसपास तलाश के बाद थाने पहुंचा दुकानदार
श्रीचंद ने आसपास वाहन की तलाश की, लेकिन कोई सुराग नहीं मिला। इसके बाद उन्होंने तारबाहर थाने पहुंचकर शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने अपराध क्रमांक 297/2026 दर्ज कर भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 303(2) के तहत मामला दर्ज कर जांच शुरू की।
मामले की जानकारी पुलिस उप महानिरीक्षक एवं वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक बिलासपुर रजनेश सिंह को दी गई। उन्होंने चोरी की एक्टिवा जल्द बरामद करने और आरोपी की गिरफ्तारी के निर्देश दिए। इसके बाद अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक शहर पंकज कुमार पटेल और नगर पुलिस अधीक्षक सिटी कोतवाली गगन कुमार के मार्गदर्शन में तारबाहर पुलिस की टीम आरोपी की तलाश में जुट गई।
त्रिवेणी भवन के पास मिला संदिग्ध
जांच के दौरान पुलिस को मुखबिर से सूचना मिली कि त्रिवेणी भवन के आसपास एक संदिग्ध व्यक्ति घूम रहा है। पुलिस टीम मौके पर पहुंची और संदेही को हिरासत में लेकर पूछताछ की।
संदेही की पहचान सुनील कुमार श्रीवास (35), निवासी वार्ड क्रमांक-4, विजय नगर, सरपंच बाड़ा के पास, भनपुरी बीरगांव, थाना खमतराई, जिला रायपुर के रूप में हुई।
पूछताछ के बाद एक्टिवा बरामद
पुलिस के अनुसार, पूछताछ में आरोपी ने 20 अगस्त को व्यापार विहार की बड़ी पार्किंग के पास से काले रंग की एक्टिवा चोरी करने की बात स्वीकार की। उसकी निशानदेही पर पुलिस ने चोरी की एक्टिवा बरामद कर जब्त कर ली। इसके बाद आरोपी को गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश किया गया, जहां से उसे न्यायिक रिमांड पर भेज दिया गया।
पुलिस का कहना है कि शहर में वाहन चोरी की घटनाओं पर रोक लगाने के लिए पार्किंग स्थलों और संवेदनशील इलाकों में निगरानी बढ़ाई जा रही है।
इस कार्रवाई में महिला प्रधान आरक्षक सरोज खलखो, आरक्षक महेंद्र सोनकर, नुरूल कादिर, रूपलाल चंद्रा और भागीरथी गेदले की अहम भूमिका रही।





