मुंबई। गणेश चतुर्थी का पर्व मुंबई में पूरे उत्साह, श्रद्धा और भक्ति के साथ शुरू हो गया है। सोमवार को बड़ी संख्या में श्रद्धालु प्रसिद्ध लालबागचा राजा के दर्शन के लिए पहुंचे। इसी दौरान बॉलीवुड अभिनेता और मार्शल आर्टिस्ट विद्युत जामवाल भी गणपति बप्पा का आशीर्वाद लेने लालबागचा राजा के दरबार पहुंचे।

विद्युत जामवाल सफेद पारंपरिक परिधान में नजर आए। उन्होंने भगवान गणेश की पूजा-अर्चना की और आरती में भी हिस्सा लिया। इस दौरान उनका भक्तिमय अंदाज वहां मौजूद लोगों के बीच खास आकर्षण का केंद्र बना रहा।


आरती के बाद डमरू और शंख बजाते दिखे विद्युत

लालबागचा राजा के दर्शन के दौरान विद्युत जामवाल पूरी तरह भक्ति में डूबे दिखाई दिए। पूजा और आरती के बाद उन्होंने डमरू अपने हाथ में लेकर बजाया और फिर शंख भी फूंका

उनका यह अंदाज सोशल मीडिया पर भी तेजी से चर्चा में आ गया। सामने आए वीडियो में विद्युत पारंपरिक वाद्य बजाते और गणपति बप्पा की आराधना करते दिखाई दे रहे हैं। आसपास बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद नजर आए।


केवल दर्शन नहीं, धार्मिक अनुष्ठानों में भी हुए शामिल

विद्युत जामवाल का लालबागचा राजा पहुंचना इसलिए भी खास रहा क्योंकि उन्होंने केवल दर्शन कर वापसी नहीं की, बल्कि वहां चल रहे धार्मिक अनुष्ठानों और उत्सव में सक्रिय रूप से हिस्सा लिया।

अभिनेता ने आरती में भाग लिया और पूरे समय श्रद्धा भाव के साथ भगवान गणेश की पूजा करते नजर आए।


लालबागचा राजा गणेशोत्सव का 93वां वर्ष

मुंबई का लालबागचा राजा देश के सबसे प्रसिद्ध गणेश पंडालों में गिना जाता है। दस दिनों तक चलने वाले गणेशोत्सव के दौरान यहां हर साल लाखों श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं।

मुंबई ही नहीं, बल्कि महाराष्ट्र और देश के अलग-अलग हिस्सों से भी भक्त लालबागचा राजा के दर्शन करने आते हैं। इस वर्ष लालबागचा राजा सार्वजनिक गणेशोत्सव मंडल अपने आयोजन का 93वां वर्ष मना रहा है।


14 सितंबर से शुरू हुआ गणेशोत्सव

साल 2026 में गणेशोत्सव की शुरुआत 14 सितंबर से हुई है। इसके साथ ही मुंबई के अलग-अलग हिस्सों में गणपति पंडालों में विशेष पूजा, आरती और सांस्कृतिक कार्यक्रम शुरू हो गए हैं।

लालबागचा राजा में भी पहले दिन से ही श्रद्धालुओं की भारी भीड़ देखने को मिल रही है।


महादेव थीम पर सजा पंडाल

इस वर्ष लालबागचा राजा का पंडाल खास महादेव थीम पर तैयार किया गया है। इसकी सजावट की प्रेरणा उज्जैन के प्रसिद्ध महाकालेश्वर मंदिर से ली गई है।

पंडाल परिसर में एक विशाल त्रिशूल भी लगाया गया है, जो पूरे वातावरण को मंदिर जैसा भव्य और आध्यात्मिक स्वरूप देता है। गणपति प्रतिमा के आसपास की सजावट में भी भगवान शिव और महाकाल की थीम की झलक देखने को मिल रही है।