गरियाबंद। ऋषि पंचमी के अवसर पर राजिम क्षेत्र के ग्राम देवरी में वर्षों पुरानी परंपरा के तहत जहरीले सांपों की अनोखी शोभायात्रा निकाली गई। ढोल-नगाड़ों की थाप के बीच सांवरा समाज के लोगों ने सांपों की पूजा-अर्चना की और पारंपरिक तरीके से उन्हें शोभायात्रा में शामिल किया। इस अनोखे आयोजन को देखने के लिए बड़ी संख्या में ग्रामीण भी पहुंचे।
ग्राम देवरी स्थित गुरु सांवरा पाठशाला में सालभर सर्पदंश से बचाव और उपचार से संबंधित प्रशिक्षण दिया जाता है। ऋषि पंचमी के दिन यहां प्रशिक्षण पूरा करने वालों के लिए दीक्षांत समारोह भी आयोजित किया जाता है।
ढोल-नगाड़ों के साथ निकली शोभायात्रा
पूजा-अर्चना के बाद समाज के लोग सांपों को लेकर गांव में शोभायात्रा के लिए निकले। इस दौरान पारंपरिक वाद्ययंत्रों और धार्मिक आस्था के साथ बड़ी संख्या में लोग कार्यक्रम में शामिल हुए। ग्रामीणों के लिए भी यह आयोजन आकर्षण का केंद्र बना रहा।
आयोजन के बाद जंगल में छोड़े गए सांप
शोभायात्रा और पूजा संपन्न होने के बाद सांपों को सुरक्षित तरीके से जंगल में छोड़ दिया गया। समाज के लोग इस परंपरा को केवल धार्मिक आयोजन के रूप में नहीं, बल्कि सर्प संरक्षण और सर्पदंश से बचाव के प्रति जागरूकता से भी जोड़कर देखते हैं।
सर्पदंश से बचाव का भी दिया जाता है प्रशिक्षण
गुरु सांवरा पाठशाला में लोगों को सांपों की पहचान, सर्पदंश से बचाव और आपात स्थिति में बरती जाने वाली सावधानियों से संबंधित प्रशिक्षण दिए जाने की जानकारी सामने आई है। ऋषि पंचमी का आयोजन इस प्रशिक्षण और समाज की पारंपरिक आस्था दोनों का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है।
देवरी में होने वाली यह परंपरा धार्मिक आस्था, लोक संस्कृति और वन्यजीव संरक्षण का अनोखा संगम पेश करती है। वर्षों से चली आ रही इस परंपरा को देखने के लिए इस बार भी बड़ी संख्या में लोग जुटे।





