अंबिकापुर। छत्तीसगढ़ के प्रमुख पर्यटन स्थलों में शामिल मैनपाट के मेहता पॉइंट पर पर्यटकों से एंट्री फीस के नाम पर कथित वसूली का मामला सामने आया है। आरोप है कि यहां आने वाले पर्यटकों से 20 रुपये से लेकर 150 रुपये तक शुल्क लिया जा रहा है, लेकिन इसके बदले उन्हें रसीद नहीं दी जा रही। मामले के सामने आने के बाद शुल्क वसूली की व्यवस्था और उसकी वैधता को लेकर सवाल उठने लगे हैं।

छह महीने पहले खत्म हो चुका टेंडर

जानकारी के मुताबिक, मेहता पॉइंट पर शुल्क वसूली से संबंधित टेंडर करीब छह महीने पहले समाप्त हो चुका है। आरोप है कि इसके बावजूद पर्यटकों से एंट्री फीस ली जा रही है। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि नई टेंडर प्रक्रिया के बिना आखिर किसके आदेश और किस आधार पर पर्यटकों से शुल्क वसूला जा रहा है।

रसीद नहीं मिलने के आरोपों ने भी मामले को गंभीर बना दिया है। पर्यटकों का कहना है कि अलग-अलग मदों में पैसे लिए जा रहे हैं, लेकिन भुगतान का कोई पुख्ता दस्तावेज नहीं दिया जा रहा।

पैसे लेने के बाद भी सुविधाओं का अभाव

पर्यटकों की नाराजगी केवल शुल्क वसूली को लेकर नहीं है। आरोप है कि मेहता पॉइंट पर सुविधाओं की स्थिति भी बदहाल है। यहां लगाए गए झूले गायब हैं, जबकि शेड से बारिश का पानी टपक रहा है। पर्यटन स्थल पर बुनियादी सुविधाओं की कमी के कारण यहां पहुंचने वाले लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

एक ओर राज्य सरकार मैनपाट को छत्तीसगढ़ के प्रमुख पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित करने की दिशा में प्रयास कर रही है, वहीं दूसरी ओर मेहता पॉइंट की मौजूदा व्यवस्था इन प्रयासों पर सवाल खड़े कर रही है।

पर्यटन मंत्री राजेश अग्रवाल ने दिए निर्देश

मामला सामने आने के बाद पर्यटन मंत्री राजेश अग्रवाल ने संबंधित अधिकारियों को आवश्यक निर्देश देने की बात कही है। अब देखना होगा कि प्रशासन शुल्क वसूली से जुड़े आरोपों की जांच कराता है या नहीं। साथ ही यह भी स्पष्ट होना बाकी है कि टेंडर समाप्त होने के बाद शुल्क किसके अधिकार से लिया जा रहा था।

मैनपाट अपनी प्राकृतिक खूबसूरती और मनोरम वादियों के कारण पर्यटकों की पसंद बना हुआ है, लेकिन मेहता पॉइंट पर कथित अवैध शुल्क वसूली और सुविधाओं की बदहाली ने पर्यटन व्यवस्था पर कई सवाल खड़े कर दिए हैं।