दुर्ग। छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले में वन विभाग में रेंजर की नौकरी दिलाने के नाम पर 8 लाख रुपये की कथित धोखाधड़ी का मामला सामने आया है। भिलाई भट्ठी पुलिस ने मामले में तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है। आरोप है कि नौकरी दिलाने का भरोसा देकर रकम लेने के बाद पीड़ित को मंत्रालय से जारी बताकर फर्जी नियुक्ति प्रमाण पत्र दिया गया था।
पुलिस ने शिकायत के आधार पर जांच करते हुए भारतेंदु मेश्राम, हनी श्रेष्ट और भोजेन्द्र कुमार को हिरासत में लिया। पूछताछ और जांच के बाद तीनों को 11 अगस्त को गिरफ्तार कर न्यायिक रिमांड पर भेज दिया गया।
बेटे को रेंजर बनाने का दिया था झांसा
भिलाई के सेक्टर-2 निवासी दिनेश कुमार ने 9 अगस्त को भिलाई भट्ठी थाने में शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायत के मुताबिक, वर्ष 2023 में आरोपियों ने उनके बेटे को वन विभाग में रेंजर के पद पर नौकरी दिलाने का भरोसा दिया था।
आरोप है कि नौकरी लगवाने के एवज में उनसे अलग-अलग समय पर कुल 8 लाख रुपये लिए गए।
मंत्रालय का बताकर दिया फर्जी नियुक्ति पत्र
शिकायतकर्ता का आरोप है कि रकम लेने के बाद उनका भरोसा बनाए रखने के लिए आरोपियों ने एक नियुक्ति प्रमाण पत्र दिया। इसे कथित तौर पर मंत्रालय से जारी दस्तावेज बताया गया था।
बाद में नौकरी नहीं मिलने पर नियुक्ति से जुड़े दस्तावेज पर भी संदेह हुआ। पुलिस जांच में नियुक्ति प्रमाण पत्र के कथित रूप से फर्जी होने की बात सामने आई है।
रकम मांगने पर करता रहा टालमटोल
जब काफी समय बीतने के बाद भी नौकरी नहीं लगी तो दिनेश कुमार ने अपनी रकम वापस मांगी। शिकायत के अनुसार, कांकेर निवासी आरोपी भारतेंदु मेश्राम लगातार टालमटोल करता रहा।
इसके बाद शिकायतकर्ता को धोखाधड़ी का संदेह हुआ और उन्होंने भिलाई भट्ठी पुलिस से संपर्क कर मामले की शिकायत की।
अलग-अलग ठिकानों से तीन आरोपी हिरासत में
मामला दर्ज करने के बाद पुलिस ने आरोपियों की तलाश शुरू की। पुलिस टीम ने अलग-अलग ठिकानों पर दबिश देकर कांकेर निवासी भारतेंदु मेश्राम, भिलाई के कोहका निवासी हनी श्रेष्ट और बालोद निवासी भोजेन्द्र कुमार को हिरासत में लिया।
पुलिस के अनुसार, पूछताछ और जांच के बाद तीनों आरोपियों को 11 अगस्त को गिरफ्तार किया गया।
न्यायिक रिमांड पर भेजे गए आरोपी
गिरफ्तारी के बाद तीनों आरोपियों को न्यायालय के समक्ष पेश किया गया, जहां से उन्हें न्यायिक रिमांड पर भेज दिया गया।
पुलिस मामले से जुड़े दस्तावेजों और आर्थिक लेन-देन की जांच कर रही है। आरोपियों के खिलाफ लगाए गए आरोपों पर अंतिम निर्णय न्यायिक प्रक्रिया के बाद होगा।




