नई दिल्ली। राष्ट्रगीत ‘वंदे मातरम’ को लेकर जारी राजनीतिक बहस के बीच अभिनेत्री शर्मिला टैगोर और भाजपा सांसद व अभिनेत्री कंगना रनौत के बयान चर्चा में हैं। शर्मिला टैगोर ने ‘वंदे मातरम’ के शुरुआती दो छंदों तक सीमित रहने की बात कही, जिस पर कंगना रनौत ने प्रतिक्रिया देते हुए उन्हें धर्म के नजरिए से कला और कविता को नहीं देखने की सलाह दी।
शर्मिला टैगोर ने ‘वंदे मातरम’ के बाद के छंदों में हिंदू देवी-देवताओं के संदर्भ का उल्लेख करते हुए कहा कि एक ईश्वर में विश्वास करने वाले कुछ लोगों के लिए इन्हें स्वीकार करना मुश्किल हो सकता है। इसी आधार पर उन्होंने शुरुआती दो छंदों को गाने का समर्थन किया।
शर्मिला टैगोर के बयान पर कंगना की प्रतिक्रिया
शर्मिला टैगोर के बयान का वीडियो कंगना रनौत ने अपनी इंस्टाग्राम स्टोरी पर साझा करते हुए प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि उन्हें खुशी है कि शर्मिला टैगोर ने इस मुद्दे पर अपनी आपत्ति खुलकर रखी, लेकिन एक कलाकार के तौर पर कविता और कला को लेकर उनके नजरिए से वह हैरान हैं।
कंगना ने तर्क दिया कि कविता और गीतों में इस्तेमाल किए जाने वाले शब्दों को हमेशा शाब्दिक अर्थ में नहीं देखा जा सकता। इनमें रूपक, कल्पना और प्रतीकों का इस्तेमाल भावनाओं तथा विचारों को व्यक्त करने के लिए किया जाता है।
स्वामी विवेकानंद का दिया उदाहरण
अपनी बात समझाने के लिए कंगना ने स्वामी विवेकानंद के विचारों का उदाहरण भी दिया। उन्होंने युवाओं की शक्ति से जुड़े विवेकानंद के कथन का जिक्र करते हुए कहा कि ऐसे वक्तव्यों का उद्देश्य शब्दों का शाब्दिक अर्थ बताना नहीं, बल्कि युवाओं में शक्ति और आत्मविश्वास जगाना होता है।
इसी तरह उन्होंने ‘वंदे मातरम’ में इस्तेमाल किए गए शब्दों को भी साहित्यिक और प्रतीकात्मक संदर्भ में देखने की बात कही।
कंगना बोलीं- हिंदू-मुस्लिम सोच से बाहर आइए
कंगना ने शर्मिला टैगोर से हिंदू-मुस्लिम के नजरिए से बाहर निकलकर इस विषय को देखने की अपील की। हालांकि अपनी प्रतिक्रिया के अंत में उन्होंने शर्मिला के प्रति सम्मान और स्नेह भी जताया।
कंगना ने कहा कि विचारों में मतभेद के बावजूद उनके मन में शर्मिला टैगोर के प्रति प्यार और सम्मान है।
दो छंदों को लेकर क्यों छिड़ी बहस?
यह विवाद कांग्रेस वर्किंग कमेटी से जुड़े उस फैसले की पृष्ठभूमि में सामने आया है, जिसमें कांग्रेस के कार्यक्रमों में ‘वंदे मातरम’ के शुरुआती दो छंद गाने की पुरानी व्यवस्था का पालन करने की बात कही गई।
इसके बाद भाजपा और कांग्रेस के बीच इस मुद्दे पर राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई। स्वतंत्रता दिवस से जुड़े एक कार्यक्रम में भी ‘वंदे मातरम’ के दौरान कांग्रेस नेताओं के व्यवहार को लेकर भाजपा ने सवाल उठाए थे, जबकि कांग्रेस ने आरोपों को खारिज किया था।
अब शर्मिला टैगोर और कंगना रनौत की प्रतिक्रियाओं के बाद ‘वंदे मातरम’ के छंदों को लेकर चल रही बहस एक बार फिर सुर्खियों में आ गई है।





