रायपुर। राजधानी रायपुर स्थित एमएम फन सिटी वाटर पार्क के वेव पूल में सुरक्षा व्यवस्था में कमी और हादसे के बाद प्राथमिक उपचार की पर्याप्त सुविधा उपलब्ध नहीं कराने के मामले में जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग ने अहम फैसला सुनाया है। आयोग ने पीड़ित अनुपम अग्रवाल के पक्ष में निर्णय देते हुए एमएम फन सिटी प्रबंधन और संबंधित बीमा कंपनी को क्षतिपूर्ति राशि का भुगतान करने का आदेश दिया है।
आयोग के आदेश के मुताबिक, पीड़ित को दो लाख रुपये चिकित्सा खर्च के रूप में दिए जाएंगे। इस राशि पर 9 जुलाई 2015 से भुगतान की तारीख तक छह प्रतिशत वार्षिक साधारण ब्याज भी देना होगा। इसके अलावा मानसिक परेशानी के लिए 25 हजार रुपये और वाद व्यय के रूप में पांच हजार रुपये देने का आदेश दिया गया है। आयोग ने आदेश का पालन 45 दिनों के भीतर करने के निर्देश दिए हैं।
वेव पूल की नाली में फंसा था पैर
मामला 25 अप्रैल 2015 का है। अनुपम अग्रवाल अपने परिवार और सहकर्मियों के साथ एमएम फन सिटी घूमने गए थे। शाम करीब छह बजे वे वेव पूल में नहा रहे थे। आरोप है कि पूल के भीतर बनी नाली पर सुरक्षा जाली नहीं लगी थी। इसी दौरान अनुपम का बायां पैर नाली में फंस गया और वे गंभीर रूप से घायल हो गए।
हादसे में उनके घुटने के नीचे की टिबिया और फिबुला हड्डी टूट गई थी। आरोप है कि दुर्घटना के बाद वाटर पार्क में उन्हें उचित प्राथमिक उपचार भी नहीं मिल सका। इसके बाद उनके साथियों ने उन्हें पहले श्री कृष्ण हॉस्पिटल और बाद में रामकृष्ण केयर हॉस्पिटल पहुंचाया।
इलाज और ऑपरेशन में खर्च हुए दो लाख से अधिक
अनुपम का 26 अप्रैल से 3 मई 2015 तक अस्पताल में इलाज चला। इस दौरान उनका ऑपरेशन भी किया गया। चिकित्सकों ने उन्हें करीब तीन महीने तक बेड रेस्ट के साथ फिजियोथेरेपी कराने की सलाह दी थी। उपचार पर दो लाख रुपये से अधिक खर्च होने की बात आयोग के समक्ष रखी गई।
फन सिटी ने हादसे से किया था इनकार
मामले की सुनवाई के दौरान एमएम फन सिटी प्रबंधन ने हादसे के दावे से इनकार किया। वहीं, बीमा कंपनी की ओर से तर्क दिया गया कि पीड़ित उसका प्रत्यक्ष ग्राहक नहीं था और संबंधित बीमा पॉलिसी एमएम वंडर पार्क प्राइवेट लिमिटेड के नाम पर जारी की गई थी।
आयोग ने इन दलीलों को स्वीकार नहीं किया। आयोग ने माना कि एमएम फन सिटी केवल ट्रेड नेम है और दुर्घटना के समय संबंधित पब्लिक लायबिलिटी पॉलिसी प्रभावी थी।
मेडिकल दस्तावेज और तस्वीरें बनीं अहम आधार
मामले में पेश किए गए मेडिकल दस्तावेजों और घटनास्थल की रंगीन तस्वीरों को आयोग ने महत्वपूर्ण साक्ष्य माना। इनके आधार पर आयोग ने वाटर पार्क की सुरक्षा व्यवस्था में कमी पाई और पीड़ित के पक्ष में फैसला सुनाया।
आयोग ने संबंधित पक्षों को निर्धारित क्षतिपूर्ति और अन्य राशि का भुगतान करते हुए 45 दिनों के भीतर आदेश का पालन करने को कहा है।





