नई दिल्ली/मुंबई, 14 जून 2026 — शरद पवार के नेतृत्व वाली राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के कांग्रेस में संभावित विलय की अटकलों के बीच केंद्रीय मंत्री रामदास आठवले ने वरिष्ठ नेता शरद पवार को भाजपा-नीत राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन यानी NDA में शामिल होने की सलाह दी है।
NDA के सहयोगी और रिपब्लिकन पार्टी ऑफ इंडिया के प्रमुख रामदास आठवले ने कहा कि शरद पवार को कांग्रेस की ओर नहीं जाना चाहिए, क्योंकि कांग्रेस अब पहले जैसी मजबूत पार्टी नहीं रही। उन्होंने कहा कि मौजूदा राजनीतिक परिस्थितियों में पवार के लिए NDA अधिक व्यावहारिक विकल्प हो सकता है।
आठवले की यह टिप्पणी उस समय आई है, जब शिवसेना नेता संजय राउत ने हाल ही में सुझाव दिया था कि कांग्रेस से अलग होकर बनी पार्टियों को भाजपा के खिलाफ मजबूत विपक्ष तैयार करने के लिए फिर से कांग्रेस में लौटना चाहिए। राउत के इस बयान के बाद महाराष्ट्र की राजनीति में नई चर्चा शुरू हो गई है।
रामदास आठवले ने आगे कहा कि यदि शरद पवार को सीधे भाजपा के साथ जाने में कोई दिक्कत है, तो उनकी पार्टी RPI के दरवाजे पवार के लिए खुले हैं। आठवले का यह बयान एक राजनीतिक निमंत्रण के साथ-साथ कांग्रेस की वर्तमान स्थिति पर टिप्पणी के रूप में भी देखा जा रहा है।
शरद पवार के अगले कदम को लेकर अटकलें ऐसे समय तेज हुई हैं, जब महाराष्ट्र की राजनीति पहले से ही बार-बार बदलते गठबंधनों, दलों में टूट और नई राजनीतिक व्यवस्थाओं के दौर से गुजर रही है। ऐसे में पवार जैसे अनुभवी नेता की संभावित रणनीति पर राजनीतिक दलों और विश्लेषकों की नजरें टिकी हुई हैं।
फिलहाल शरद पवार या उनकी पार्टी के वरिष्ठ नेताओं की ओर से कांग्रेस में विलय की अटकलों पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। इस चुप्पी ने राजनीतिक जिज्ञासा को और बढ़ा दिया है कि क्या पवार विपक्षी एकजुटता की दिशा में कोई कदम सोच रहे हैं या फिर यह केवल राजनीतिक माहौल को परखने की रणनीति है।
NDA के लिए शरद पवार से जुड़ी किसी भी राजनीतिक हलचल का प्रतीकात्मक महत्व है। पवार महाराष्ट्र के सबसे अनुभवी नेताओं में से एक हैं और राज्य की सहकारी, ग्रामीण और संसदीय राजनीति में उनकी गहरी पकड़ मानी जाती है। उनके किसी भी संभावित कदम का असर केवल पार्टी गणित तक सीमित नहीं रहेगा।
कांग्रेस के लिए यह बहस अलग तरह की चुनौती पेश करती है। संजय राउत का सुझाव इस विचार को आगे बढ़ाता है कि भाजपा के खिलाफ बिखरी हुई विपक्षी ताकतों को एकजुट होना चाहिए। लेकिन आठवले की प्रतिक्रिया यह दिखाती है कि सत्तारूढ़ गठबंधन इस चर्चा को कांग्रेस की घटती राजनीतिक ताकत के सवाल में बदलना चाहता है।
फिलहाल यह पूरा घटनाक्रम किसी पक्के राजनीतिक बदलाव से अधिक संकेतों और अटकलों पर आधारित है। लेकिन महाराष्ट्र की राजनीति में, जहां गठबंधन तेजी से बदलते रहे हैं और वरिष्ठ नेताओं की चुप्पी भी राजनीतिक संदेश बन जाती है, ऐसी अटकलें भी सत्ता संतुलन में बदलाव का संकेत मानी जाती हैं।





