जगदलपुर। शहीद महेंद्र कर्मा विश्वविद्यालय (बस्तर विश्वविद्यालय) में प्रोफेसर, एसोसिएट प्रोफेसर और असिस्टेंट प्रोफेसर के पदों पर चल रही भर्ती प्रक्रिया को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। जगदलपुर के पूर्व विधायक एवं भाजपा नेता संतोष बाफना ने भर्ती में पारदर्शिता और नियमों के पालन को लेकर विश्वविद्यालय प्रशासन पर सवाल उठाए हैं। वहीं, प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने भी मामले की जांच की मांग की है।


स्थानीय अभ्यर्थियों की अनदेखी का आरोप

संतोष बाफना का आरोप है कि विश्वविद्यालय की भर्ती प्रक्रिया में स्थानीय अभ्यर्थियों के बजाय दूसरे राज्यों के आवेदकों को प्राथमिकता दी जा रही है। उन्होंने दावा किया कि पहले 59 और बाद में 162 शैक्षणिक पदों पर भर्ती प्रक्रिया की गई, लेकिन इसमें यूजीसी के नियमों का समुचित पालन नहीं किया गया।

हालांकि, इन आरोपों पर विश्वविद्यालय प्रशासन का पक्ष सामने आने के बाद स्थिति और स्पष्ट हो सकेगी।


दावा-आपत्ति की सूची पर भी उठाए सवाल

पूर्व विधायक ने भर्ती प्रक्रिया में जारी दावा-आपत्ति सूची को लेकर भी सवाल खड़े किए हैं। उनका आरोप है कि सूची में अभ्यर्थियों की पूरी जानकारी सार्वजनिक करने के बजाय केवल आवेदन क्रमांक जारी किए गए।

बाफना का कहना है कि अभ्यर्थियों से जुड़ी आवश्यक जानकारी सार्वजनिक नहीं होने से भर्ती प्रक्रिया की पारदर्शिता को लेकर सवाल खड़े होते हैं।


कांग्रेस ने भी की जांच की मांग

भाजपा नेता संतोष बाफना की ओर से उठाए गए सवालों के बीच कांग्रेस भी इस मुद्दे पर सामने आई है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने भर्ती प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए सरकार से मामले की जांच के लिए समिति गठित करने की मांग की है।

उन्होंने यह भी कहा है कि कांग्रेस विधायक इस मुद्दे को विधानसभा में उठाएंगे। भाजपा और कांग्रेस दोनों ओर से सवाल उठने के बाद बस्तर विश्वविद्यालय की भर्ती प्रक्रिया को लेकर राजनीतिक हलचल तेज हो गई है।