रायपुर। रायपुर मेडिकल कॉलेज के कम्युनिटी मेडिसिन विभाग में करीब 1 करोड़ 62 लाख 28 हजार रुपये के खर्च का पूरा हिसाब अब भी सवालों के घेरे में है। यह रकम अलग-अलग स्वास्थ्य कार्यक्रमों, यूनिसेफ और अन्य योजनाओं से विभाग के खाते में आई थी। जांच में लाखों रुपये नकद निकालने, सेल्फ चेक के जरिए राशि निकालने और निजी खाते में रकम ट्रांसफर होने की बात सामने आई है।


पूर्व HOD के कार्यकाल से जुड़ा मामला

रिपोर्ट के अनुसार, डॉ. आशीष सिन्हा जुलाई 2014 से मई 2018 तक कम्युनिटी मेडिसिन विभाग के प्रमुख रहे। इसी अवधि में विभाग के खाते से करीब 1.62 करोड़ रुपये खर्च किए गए, लेकिन इस राशि से जुड़े पूरे दस्तावेज, बिल-वाउचर और वित्तीय रिकॉर्ड लंबे समय तक विभाग को उपलब्ध नहीं हो सके। करीब छह साल बाद अस्पताल प्रबंधन ने जांच कमेटी गठित की।


लाखों की निकासी और निजी खाते में ट्रांसफर

प्रारंभिक वित्तीय जांच में सामने आया कि विभाग के खाते से करीब 18 लाख 67 हजार 590 रुपये नकद, 27 लाख 89 हजार 901 रुपये सेल्फ के जरिए निकाले गए। इसके अलावा करीब 38 लाख 91 हजार 522 रुपये निजी खाते में ट्रांसफर किए जाने का भी उल्लेख है।


यूनिसेफ और स्वास्थ्य योजनाओं का भी था फंड

कम्युनिटी मेडिसिन विभाग के खाते में यूनिसेफ, राष्ट्रीय स्वास्थ्य कार्यक्रमों और अन्य योजनाओं से भी राशि आती थी। ऐसे में इन पैसों का उपयोग किस मद में हुआ, इसके बिल, कैशबुक, लेजर और अन्य वित्तीय दस्तावेजों का रिकॉर्ड होना जरूरी था। जांच में इन्हीं दस्तावेजों की उपलब्धता और उपयोग पर सवाल उठाए गए हैं।


2024 में बनी थी तीन सदस्यीय जांच समिति

अगस्त 2024 में अस्पताल प्रबंधन ने मामले की जांच के लिए तीन सदस्यीय समिति बनाई थी। इसमें डॉक्टरों के साथ वित्त विभाग की अधिकारी को भी शामिल किया गया। समिति ने कैशबुक, लेजर, ऑडिट रिपोर्ट, चेक रजिस्टर, आय-व्यय विवरण और बिल-वाउचर मांगे थे।


पदोन्नति से जुड़ी प्रक्रिया में सामने आया मामला

यह प्रकरण नियमित वित्तीय ऑडिट के दौरान नहीं, बल्कि डॉ. सिन्हा की पदोन्नति के लिए जरूरी प्रमाणपत्र से जुड़ी प्रक्रिया के समय सामने आया। उस दौरान विभाग ने बताया कि उनके कार्यकाल की वित्तीय जानकारी उपलब्ध नहीं है, जिसके बाद जांच शुरू की गई।


वसूली और जिम्मेदारी पर अब भी सवाल

रिपोर्ट में यह स्पष्ट नहीं है कि जांच के बाद संबंधित रकम की वसूली हुई या नहीं, जिम्मेदारी तय की गई या नहीं और कोई विभागीय कार्रवाई हुई या नहीं। फिलहाल यही सबसे बड़ा सवाल बना हुआ है कि करोड़ों रुपये के खर्च का पूरा हिसाब कब और कैसे स्पष्ट होगा।