रायपुर। कांग्रेस के जिला अध्यक्षों और संगठन पदाधिकारियों के प्रशिक्षण शिविर को लेकर छत्तीसगढ़ की राजनीति में बयानबाजी तेज हो गई है। प्रदेश के उपमुख्यमंत्री अरुण साव ने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि प्रशिक्षण शिविर आयोजित करने से पार्टी की अंदरूनी कलह खत्म नहीं होने वाली है। वहीं प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने पलटवार करते हुए कहा कि भाजपा पहले यह स्पष्ट करे कि हाल ही में हुई बैठक में डिप्टी सीएम को निशाने पर क्यों लिया गया और क्या उनसे इस्तीफा मांगा गया था या नहीं।

अरुण साव का कांग्रेस पर हमला

उपमुख्यमंत्री अरुण साव ने कहा कि कांग्रेस संगठन को मजबूत करने के लिए प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित कर रही है, लेकिन पार्टी के भीतर चल रही गुटबाजी और आपसी मतभेद किसी से छिपे नहीं हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस नेताओं के बीच नेतृत्व को लेकर लगातार खींचतान बनी हुई है और प्रशिक्षण शिविर से इन समस्याओं का समाधान नहीं होगा।

साव ने कहा कि कांग्रेस पहले अपने संगठनात्मक विवादों और नेताओं के बीच मतभेदों को दूर करे, तभी जनता के बीच उसकी विश्वसनीयता बढ़ सकेगी।

दीपक बैज का पलटवार

प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने भाजपा के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि कांग्रेस का प्रशिक्षण शिविर संगठन को मजबूत बनाने और कार्यकर्ताओं को नई रणनीति से जोड़ने के उद्देश्य से आयोजित किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि भाजपा को कांग्रेस की चिंता करने के बजाय अपने घर की स्थिति पर ध्यान देना चाहिए।

बैज ने सवाल उठाते हुए कहा कि हाल ही में भाजपा की एक महत्वपूर्ण बैठक में डिप्टी सीएम को लेकर गंभीर चर्चाएं हुई थीं। उन्होंने पूछा कि क्या बैठक में उनसे इस्तीफा मांगा गया था या नहीं, भाजपा को इस पर सार्वजनिक रूप से जवाब देना चाहिए।

प्रशिक्षण शिविर का उद्देश्य

कांग्रेस का यह प्रशिक्षण शिविर संगठनात्मक मजबूती, आगामी चुनावों की तैयारी और कार्यकर्ताओं को पार्टी की नीतियों एवं रणनीतियों से अवगत कराने के लिए आयोजित किया जा रहा है। इसमें जिला अध्यक्षों और वरिष्ठ नेताओं को संगठन विस्तार, जनसंपर्क अभियान और राजनीतिक मुद्दों पर प्रशिक्षण दिया जाएगा।

राजनीतिक माहौल गरमाया

दोनों दलों के नेताओं के बयानों के बाद प्रदेश की राजनीति में एक बार फिर आरोप-प्रत्यारोप का दौर शुरू हो गया है। कांग्रेस जहां प्रशिक्षण शिविर को संगठन सशक्तिकरण का माध्यम बता रही है, वहीं भाजपा इसे पार्टी की आंतरिक चुनौतियों को छिपाने का प्रयास बता रही है।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि आगामी चुनावी रणनीतियों और संगठनात्मक गतिविधियों को लेकर दोनों दलों के बीच आने वाले दिनों में बयानबाजी और तेज हो सकती है।