दंतेवाड़ा। बस्तर अंचल की जानी-मानी समाजसेवी और आदिवासी समुदाय के बीच "बड़ी दीदी" के नाम से प्रसिद्ध डॉ. बुधरी ताती को उनके लंबे सामाजिक योगदान के लिए पद्मश्री 2026 से सम्मानित किया गया है। उन्होंने पिछले चार दशकों से अधिक समय से दंतेवाड़ा और बस्तर के दूरस्थ वनांचल क्षेत्रों में महिलाओं के सशक्तिकरण, शिक्षा, स्वास्थ्य जागरूकता और सामाजिक सुधार के लिए उल्लेखनीय कार्य किया है। डॉ. बुधरी ताती दंतेवाड़ा जिले के हिरानार गांव की रहने वाली हैं। उन्होंने वर्ष 1984 से सामाजिक कार्यों की शुरुआत की और कठिन परिस्थितियों के बावजूद सैकड़ों आदिवासी गांवों तक पहुंचकर लोगों को शिक्षा, स्वच्छता, नशामुक्ति और महिला अधिकारों के प्रति जागरूक किया। बताया जाता है कि उन्होंने पैदल चलकर 500 से अधिक गांवों में जनजागरण अभियान चलाया।
उनके प्रयासों से बड़ी संख्या में आदिवासी महिलाएं आत्मनिर्भर बनीं। उन्होंने बालिका शिक्षा को बढ़ावा देने के साथ-साथ महिलाओं को स्वरोजगार और कौशल विकास से जोड़ने का काम किया। सामाजिक सेवा के क्षेत्र में उनके योगदान को पहले भी राज्य स्तर पर सम्मान मिल चुका है।
केंद्र सरकार द्वारा वर्ष 2026 के पद्म पुरस्कारों की घोषणा में डॉ. बुधरी ताती का नाम सामाजिक कार्य श्रेणी में शामिल किया गया। यह सम्मान न केवल उनके व्यक्तिगत समर्पण की पहचान है, बल्कि बस्तर के आदिवासी समाज और वहां किए गए जमीनी स्तर के कार्यों को भी राष्ट्रीय स्तर पर सम्मान दिलाने वाला माना जा रहा है। डॉ. बुधरी ताती ने सम्मान मिलने पर इसे पूरे आदिवासी समाज की उपलब्धि बताते हुए कहा कि उनका लक्ष्य आगे भी शिक्षा, स्वास्थ्य और महिला सशक्तिकरण के क्षेत्र में कार्य करते रहना है।





