गरियाबंद/मैनपुर। गरियाबंद जिले के मैनपुर क्षेत्र में हाथियों की लगातार आवाजाही ने ग्रामीणों की चिंता बढ़ा दी है। जंगलों से निकलकर हाथियों के झुंड आबादी वाले इलाकों और खेतों के आसपास पहुंच रहे हैं। हालात ऐसे हैं कि कई गांवों में कच्चे मकानों में रहने वाले परिवार रात के समय अपने घर छोड़कर पड़ोस के पक्के मकानों की छतों पर बने अस्थायी तंबुओं में शरण लेने को मजबूर हैं।
जानकारी के मुताबिक, क्षेत्र में सिकासेर दल के करीब 32 और चंदा दल के 9 हाथी अलग-अलग इलाकों में विचरण कर रहे हैं। इस तरह 40 से अधिक हाथियों की मौजूदगी करीब 17 गांवों के आसपास बताई जा रही है।
छतों पर तिरपाल के तंबू बने सुरक्षा का सहारा
हाथी प्रभावित गांवों में अब पक्के मकानों की छतों पर तिरपाल, बांस और बल्लियों से बने छोटे-छोटे तंबू ग्रामीणों के लिए अस्थायी शरणस्थली बन गए हैं।
जैसे ही हाथी अलर्ट एप या हाथी मित्र दल के जरिए हाथियों के गांव की ओर बढ़ने की सूचना मिलती है, कच्चे मकानों में रहने वाले परिवार बच्चों और महिलाओं को लेकर पक्के मकानों की छतों पर पहुंच जाते हैं।
ग्रामीणों का कहना है कि रात के समय हाथियों की हलचल सबसे अधिक चिंता पैदा करती है। उन्हें डर रहता है कि हाथी किसी भी समय खेतों से होते हुए गांव के भीतर पहुंच सकते हैं।
छिन्दौला से गिरहोला तक हाथियों की गतिविधि
हाथियों की लगातार आवाजाही अभयारण्य की सीमा से लगे सामान्य वन क्षेत्र में देखी जा रही है। छिन्दौला, डंडईपानी, खोलपारा, सिहार, दबनई, फरसेरा और गिरहोला समेत आसपास के कई गांवों में हाथियों की मौजूदगी की सूचना मिल रही है।
दो अलग-अलग झुंडों में घूम रहे हाथियों के कारण ग्रामीण लगातार सतर्क हैं। गांव के पास हाथी पहुंचने की जानकारी मिलते ही लोग सबसे पहले अपने परिवार को सुरक्षित स्थान पर पहुंचाने में जुट जाते हैं।
खेतों की फसल को पहुंचा रहे नुकसान
ग्रामीणों के अनुसार, जंगल से निकलने वाले हाथी सबसे पहले खेतों में लगी फसलों की ओर रुख कर रहे हैं। इस समय क्षेत्र में मक्का और धान की फसल तैयार होने के कारण हाथियों की आवाजाही और बढ़ गई है।
हाथियों के झुंड खेतों में घुसकर फसल को खाने के साथ रौंद भी रहे हैं। केले के पेड़ भी हाथियों के निशाने पर आ रहे हैं। इससे किसानों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है।
घरों तक पहुंचने का भी बना रहता है खतरा
फसल खाने के बाद हाथियों के गांव की ओर बढ़ने का खतरा भी बना रहता है। ग्रामीणों के मुताबिक कई बार हाथी कच्चे मकानों को नुकसान पहुंचाकर अंदर रखा महुआ, चावल और अन्य खाद्य सामग्री भी खा जाते हैं।
यही कारण है कि हाथी प्रभावित गांवों में रहने वाले परिवार रात के समय अपने कच्चे मकानों में सोने से बच रहे हैं।
हाथी अलर्ट एप और मित्र दल से निगरानी
वन विभाग हाथियों की गतिविधियों पर लगातार नजर बनाए हुए है। हाथियों की संभावित लोकेशन और उनके गांव की ओर बढ़ने की जानकारी ग्रामीणों तक पहुंचाने के लिए हाथी अलर्ट एप और हाथी मित्र दल की मदद ली जा रही है।
वन विभाग के अधिकारियों के मुताबिक हाथियों के व्यवहार का पहले से सटीक अनुमान लगाना मुश्किल होता है। ऐसे में समय पर मिलने वाली सूचना ही ग्रामीणों को सुरक्षित रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
नुकसान का किया जा रहा आकलन
हाथियों की आवाजाही के कारण खेतों की फसल और संपत्ति को नुकसान पहुंचने के मामले भी सामने आ रहे हैं। वन विभाग की ओर से प्रभावित क्षेत्रों का निरीक्षण कर नुकसान का आकलन किया जा रहा है।
नियमों के अनुसार प्रभावित ग्रामीणों को क्षतिपूर्ति देने की प्रक्रिया भी की जा रही है।
फिलहाल मैनपुर क्षेत्र के कई गांवों में स्थिति ऐसी है कि दिन ढलते ही ग्रामीणों की चिंता बढ़ जाती है। हाथियों की आहट मिलते ही परिवार घरों से निकलकर सुरक्षित स्थानों की ओर जाने लगते हैं और पूरी रात सतर्क रहकर गुजारनी पड़ती है।





