मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार की 'छत्तीसगढ़ नक्सलवादी आत्मसमर्पण/पीड़ित राहत एवं पुनर्वास नीति-2025' का लाभ अब नक्सल प्रभावित परिवारों तक पहुंचने लगा है। इसी कड़ी में दंतेवाड़ा जिले के नक्सल हिंसा से प्रभावित परिवार के सदस्य देवा मंडावी को शासकीय सेवा में नियुक्ति दी गई है।
देवा मंडावी दंतेवाड़ा जिले के कुआकोंडा विकासखंड अंतर्गत ग्राम धुरवापारा, अरनपुर के निवासी हैं। उनके पिता स्वर्गीय बुधरा मंडावी नक्सल हिंसा से प्रभावित रहे थे। जिला स्तरीय पुनर्वास समिति की अनुशंसा और दंतेवाड़ा कलेक्टर की स्वीकृति के बाद देवा मंडावी को कलेक्टर कार्यालय (भू-अभिलेख शाखा), दक्षिण बस्तर दंतेवाड़ा में भृत्य (चतुर्थ श्रेणी) के पद पर नियुक्त किया गया है। वह जल्द ही अपनी नई जिम्मेदारी संभालेंगे।
यह नियुक्ति गृह विभाग (सी-अनुभाग) की ओर से 28 मार्च 2025 को जारी अधिसूचना के प्रावधानों के तहत की गई है। नियुक्ति के साथ उन्हें सातवें वेतन आयोग के अनुसार वेतन मैट्रिक्स लेवल-01 का वेतन, महंगाई भत्ता तथा शासन के नियमानुसार अन्य सुविधाएं भी मिलेंगी।
राज्य सरकार का कहना है कि पुनर्वास नीति का उद्देश्य नक्सल हिंसा से प्रभावित परिवारों को आर्थिक संबल, सम्मानजनक रोजगार और समाज की मुख्यधारा से जोड़ना है। इस पहल से प्रभावित परिवारों को स्थायी आजीविका मिलने के साथ उनके भविष्य को सुरक्षित बनाने की दिशा में भी मदद मिलेगी।





