बलरामपुर। सरकारी कार्यालयों में कार्य संस्कृति को लेकर अक्सर चर्चाएं होती रहती हैं, लेकिन इन दिनों जिले के एक विभाग की कार्यप्रणाली खास चर्चा का विषय बनी हुई है। विभाग के वरिष्ठ अधिकारी की कार्यशैली को लेकर कर्मचारियों और प्रशासनिक गलियारों में तरह-तरह की बातें सामने आ रही हैं।
बताया जा रहा है कि आम नागरिकों के कार्यों में नियमों का कड़ाई से पालन कराया जाता है, जबकि प्रभावशाली लोगों से जुड़े मामलों में वही नियम अपेक्षाकृत नरम नजर आते हैं। विभाग के अंदर यह चर्चा भी है कि कुछ कर्मचारियों के प्रति सख्ती दिखाई जाती है, जबकि कुछ को विशेष राहत मिलने की बात कही जा रही है।
सूत्रों का दावा है कि समीक्षा बैठकों के दौरान कई बार अधिकारियों के सामने जरूरी आंकड़ों और तथ्यों की कमी देखने को मिलती है। सवालों की लंबी सूची होती है, लेकिन कई मामलों में संतोषजनक जवाब नहीं मिल पाते। बैठक समाप्त होने के बाद विभागीय कर्मचारियों के बीच चर्चा आंकड़ों से ज्यादा तैयारी के स्तर को लेकर होती है।
विभाग के भीतर यह भी कहा जा रहा है कि शिकायत करने वाले कर्मचारियों को नियमों और प्रक्रियाओं का हवाला देकर शांत कराने की कोशिश की जाती है, जबकि करीबी माने जाने वाले लोगों के मामलों में व्यवहार अपेक्षाकृत अलग दिखाई देता है। कर्मचारियों के बीच यह चर्चा भी है कि कई बार कार्यक्षमता से अधिक व्यक्तिगत संबंधों को महत्व मिलता नजर आता है।
सुशासन और पारदर्शिता को लेकर लगातार जोर दिए जाने के बीच विभाग की कार्यप्रणाली पर उठ रहे सवाल चर्चा का विषय बने हुए हैं। लोगों का कहना है कि यदि समीक्षा बैठकों में ही पूरी तैयारी और तथ्यात्मक जानकारी का अभाव दिखाई दे, तो आम नागरिकों को समयबद्ध और गुणवत्तापूर्ण सेवाएं उपलब्ध कराने की व्यवस्था पर भी सवाल उठना स्वाभाविक है।
अब सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि विभागीय नेतृत्व इन चर्चाओं को केवल अफवाह मानकर छोड़ देता है या फिर पूरे मामले की निष्पक्ष समीक्षा कर जवाबदेही और पारदर्शिता को लेकर स्पष्ट संदेश देता है।




