नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने किसानों को आर्थिक रूप से मजबूत बनाने और कृषि क्षेत्र को प्रोत्साहन देने के उद्देश्य से किसान क्रेडिट कार्ड (KCC) योजना का दायरा बढ़ा दिया है। अब किसानों को खेती के साथ-साथ पशुपालन, डेयरी, मत्स्य पालन और अन्य कृषि आधारित गतिविधियों के लिए भी आसान शर्तों पर ऋण उपलब्ध कराया जाएगा। सरकार ने योजना के तहत ऋण सीमा बढ़ाने के साथ बिना गारंटी मिलने वाले लोन की सीमा में भी वृद्धि की है।
अब ₹5 लाख तक की ऋण सीमा
सरकार ने किसानों की बढ़ती जरूरतों को ध्यान में रखते हुए किसान क्रेडिट कार्ड के तहत मिलने वाली ऋण सीमा ₹3 लाख से बढ़ाकर ₹5 लाख कर दी है। इस राशि का उपयोग किसान बीज, खाद, कृषि उपकरण, सिंचाई, फसल भंडारण तथा अन्य कृषि कार्यों के लिए कर सकेंगे। इसके अलावा पशुपालन और डेयरी जैसे व्यवसायों के विस्तार में भी यह राशि उपयोगी होगी।
बिना गारंटी ₹2 लाख तक का ऋण
छोटे और सीमांत किसानों को राहत देते हुए सरकार ने बिना किसी संपत्ति या जमीन को गिरवी रखे मिलने वाले ऋण की सीमा ₹1.60 लाख से बढ़ाकर ₹2 लाख कर दी है। इससे ऐसे किसानों को आसानी से बैंक ऋण मिल सकेगा, जिनके पास गारंटी देने के लिए पर्याप्त संपत्ति नहीं है।
खेती के साथ अन्य व्यवसाय भी शामिल
अब किसान क्रेडिट कार्ड केवल पारंपरिक खेती तक सीमित नहीं रहेगा। योजना के तहत पशुपालन, मत्स्य पालन, डेयरी, बकरी पालन और सूअर पालन जैसे कृषि आधारित व्यवसायों के लिए भी ऋण की सुविधा उपलब्ध होगी। सरकार का उद्देश्य किसानों की आय के स्रोत बढ़ाना और उन्हें साहूकारों के महंगे कर्ज से बचाना है।
समय पर भुगतान करने पर कम ब्याज
किसान क्रेडिट कार्ड के तहत सामान्य रूप से अल्पकालीन कृषि ऋण पर 7 प्रतिशत वार्षिक ब्याज लगता है। हालांकि, समय पर ऋण चुकाने वाले किसानों को सरकार 3 प्रतिशत ब्याज सब्सिडी देती है। इससे प्रभावी ब्याज दर घटकर 4 प्रतिशत रह जाती है।
ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों माध्यम से आवेदन
किसान किसी भी सरकारी, ग्रामीण या सहकारी बैंक में जाकर किसान क्रेडिट कार्ड के लिए आवेदन कर सकते हैं। इसके अलावा जन समर्थ पोर्टल और किसान ऋण पोर्टल के माध्यम से ऑनलाइन आवेदन की सुविधा भी उपलब्ध है। आवेदन के लिए आधार कार्ड, पैन कार्ड, बैंक खाते की जानकारी और कृषि भूमि अथवा संबंधित व्यवसाय से जुड़े आवश्यक दस्तावेज जमा करने होंगे।
किसानों को मिलेगा बड़ा लाभ
सरकार का मानना है कि योजना में किए गए इन बदलावों से किसानों को खेती और कृषि आधारित व्यवसायों के लिए समय पर सस्ता ऋण मिलेगा। इससे उनकी आय बढ़ाने, आधुनिक खेती को बढ़ावा देने और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने में मदद मिलेगी। साथ ही प्राकृतिक आपदा जैसी परिस्थितियों में भी किसानों को ऋण भुगतान में नियमानुसार राहत उपलब्ध कराई जाएगी।





