कोंडागांव, 30 जून। छत्तीसगढ़ के कोंडागांव जिले के फरसगांव तहसील कार्यालय में मंगलवार को एंटी करप्शन ब्यूरो (एसीबी) ने भ्रष्टाचार के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए तहसीलदार के रीडर को रिश्वत लेते हुए रंगे हाथ गिरफ्तार कर लिया। कार्रवाई के बाद पूरे तहसील कार्यालय में हड़कंप मच गया और कर्मचारियों के बीच दिनभर अफरा-तफरी का माहौल बना रहा।


गिरफ्तार आरोपी की पहचान मुकेश रंगारी के रूप में हुई है, जो फरसगांव तहसीलदार कार्यालय में रीडर के पद पर पदस्थ था। एसीबी ने आरोपी को शिकायतकर्ता से रिश्वत की रकम लेते समय ट्रैप कर गिरफ्तार किया। इसके बाद टीम ने आवश्यक दस्तावेजी कार्रवाई पूरी कर आरोपी से पूछताछ शुरू कर दी।


नामांतरण प्रकरण में मांगी थी रिश्वत

एसीबी अधिकारियों के अनुसार ग्राम पाटला निवासी बिसुलाल नेताम ने शिकायत दर्ज कराई थी कि उसके भूमि संबंधी नामांतरण (म्यूटेशन) प्रकरण में उसके पिता और बुआ का नाम राजस्व अभिलेखों में दर्ज करने के एवज में तहसीलदार के रीडर मुकेश रंगारी ने 70 हजार रुपये की रिश्वत की मांग की थी।

शिकायतकर्ता ने रिश्वत देने से इनकार करते हुए पूरे मामले की जानकारी एंटी करप्शन ब्यूरो को दी। शिकायत मिलने के बाद एसीबी ने मामले का गोपनीय सत्यापन कराया, जिसमें रिश्वत मांगने की पुष्टि होने पर ट्रैप की योजना तैयार की गई।


योजना के तहत रंगे हाथ दबोचा

पूर्व निर्धारित योजना के अनुसार शिकायतकर्ता को रिश्वत की राशि लेकर तहसील कार्यालय भेजा गया। जैसे ही आरोपी ने शिकायतकर्ता से रिश्वत की रकम स्वीकार की, पहले से तैनात एसीबी की टीम ने मौके पर पहुंचकर उसे रंगे हाथ गिरफ्तार कर लिया।


कार्रवाई के दौरान एसीबी अधिकारियों ने आरोपी के कब्जे से रिश्वत की रकम बरामद की। इसके बाद नियमानुसार पंचनामा तैयार किया गया और आरोपी को हिरासत में लेकर आगे की कानूनी प्रक्रिया शुरू की गई।


तहसील कार्यालय में मचा हड़कंप

एसीबी की कार्रवाई की सूचना मिलते ही फरसगांव तहसील कार्यालय में कर्मचारियों और आम लोगों के बीच हड़कंप मच गया। कार्यालय परिसर में बड़ी संख्या में लोगों की भीड़ जमा हो गई। अचानक हुई कार्रवाई से कई अधिकारी और कर्मचारी भी सकते में आ गए।


आगे की जांच जारी

एसीबी अब यह भी जांच कर रही है कि आरोपी ने पहले भी इस तरह रिश्वत लेकर अन्य मामलों का निपटारा किया है या नहीं। साथ ही यह भी पता लगाया जा रहा है कि इस मामले में किसी अन्य अधिकारी या कर्मचारी की भूमिका तो नहीं है।


अधिकारियों ने बताया कि आरोपी के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज कर आगे की कार्रवाई की जा रही है। एसीबी ने आम नागरिकों से भी अपील की है कि यदि कोई सरकारी कर्मचारी किसी कार्य के बदले रिश्वत की मांग करता है, तो उसकी तत्काल शिकायत करें, ताकि भ्रष्टाचार के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई की जा सके।