नई दिल्ली। कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में भारत के स्टार भारोत्तोलक लवप्रीत सिंह ने शानदार प्रदर्शन करते हुए पुरुषों के +110 किलोग्राम वर्ग में रजत पदक अपने नाम किया। लवप्रीत स्वर्ण पदक से महज एक किलोग्राम पीछे रह गए, लेकिन उन्होंने स्नैच वर्ग में नया कॉमनवेल्थ गेम्स रिकॉर्ड बनाकर अपनी प्रतिभा का लोहा मनवा दिया।

साधारण परिवार से अंतरराष्ट्रीय मंच तक का सफर

पंजाब के अमृतसर के रहने वाले लवप्रीत सिंह का जीवन संघर्ष और मेहनत की मिसाल है। उनके पिता सिलाई का काम करते हैं, जबकि दादा सब्जी बेचकर परिवार का पालन-पोषण करते थे। सीमित संसाधनों के बावजूद परिवार ने लवप्रीत के खेल करियर को आगे बढ़ाने में कोई कसर नहीं छोड़ी।

कड़ी मेहनत से बनाई अलग पहचान

लवप्रीत ने कम उम्र से ही वेटलिफ्टिंग में रुचि दिखाई और लगातार मेहनत के दम पर राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में अपनी पहचान बनाई। वे भारतीय नौसेना से भी जुड़े हैं और वर्षों से देश के लिए पदक जीतते आ रहे हैं।

उपलब्धियों से भरा करियर

लवप्रीत सिंह ने 2017 जूनियर कॉमनवेल्थ चैंपियनशिप में स्वर्ण पदक जीता था। इसके बाद 2021 कॉमनवेल्थ वेटलिफ्टिंग चैंपियनशिप में रजत पदक हासिल किया। वर्ष 2022 के बर्मिंघम कॉमनवेल्थ गेम्स में उन्होंने कांस्य पदक जीता और अब 2026 ग्लासगो कॉमनवेल्थ गेम्स में रजत पदक जीतकर भारत का गौरव बढ़ाया है।

गोल्ड से चूके, लेकिन बनाया रिकॉर्ड

ग्लासगो में हुए मुकाबले में लवप्रीत ने स्नैच में शानदार प्रदर्शन करते हुए नया कॉमनवेल्थ गेम्स रिकॉर्ड बनाया। हालांकि क्लीन एंड जर्क के अंतिम प्रयास में सफलता नहीं मिलने के कारण वह स्वर्ण पदक से केवल एक किलोग्राम पीछे रह गए। इसके बावजूद उनका प्रदर्शन पूरे देश के लिए गर्व का विषय बना।

युवाओं के लिए प्रेरणा

लवप्रीत सिंह की कहानी यह साबित करती है कि कठिन परिस्थितियां भी सफलता की राह नहीं रोक सकतीं। साधारण परिवार से निकलकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत का नाम रोशन करने वाले लवप्रीत आज लाखों युवाओं के लिए प्रेरणा बन चुके हैं।