कांकेर, 18 जुलाई 2026। छत्तीसगढ़ के उत्तर बस्तर कांकेर जिले के अंतागढ़ विकासखंड स्थित सारंडी आश्रम में रहकर पढ़ाई कर रहे 15 वर्षीय आदिवासी छात्र की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार छात्र पिछले दो दिनों से बुखार से पीड़ित था। उसका मलेरिया और टाइफाइड की जांच कर दवा दी गई थी, लेकिन तबीयत बिगड़ने के बावजूद उसे बड़े अस्पताल रेफर नहीं किए जाने के आरोप सामने आए हैं। घटना के बाद स्वास्थ्य विभाग और आश्रम प्रबंधन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं।
दो दिन से था बीमार, दवा के बाद भी नहीं मिली राहत
जानकारी के मुताबिक छात्र पिछले दो दिनों से बुखार और अन्य स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं से जूझ रहा था। वह अपने साथियों के साथ आरोग्य स्वास्थ्य केंद्र पहुंचा, जहां उसकी मलेरिया और टाइफाइड की जांच की गई। जांच के बाद डॉक्टरों ने उसे दवाइयां देकर वापस आश्रम भेज दिया।
बताया जा रहा है कि छात्र ने नियमित रूप से दवा ली, लेकिन उसकी हालत में कोई सुधार नहीं हुआ। इसके बावजूद उसे सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र या जिला अस्पताल रेफर नहीं किया गया।
सुबह नहीं उठा छात्र, मची अफरा-तफरी
बीमारी के दौरान छात्र रात में आश्रम में सो गया। शनिवार सुबह जब साथी छात्रों ने उसे जगाने की कोशिश की तो उसने कोई प्रतिक्रिया नहीं दी। इसके बाद आश्रम के कर्मचारियों और अधीक्षक को सूचना दी गई। सूचना मिलते ही प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग की टीम मौके पर पहुंची।
व्यवस्था पर उठे कई सवाल
घटना के बाद कई गंभीर सवाल सामने आए हैं। यदि छात्र की तबीयत लगातार बिगड़ रही थी तो उसे समय रहते उच्च स्वास्थ्य केंद्र क्यों नहीं भेजा गया? वहीं, यह भी जानकारी सामने आई है कि घटना के समय आश्रम अधीक्षक रात में आश्रम में मौजूद नहीं थे, जिससे आश्रमों की निगरानी और बच्चों की सुरक्षा व्यवस्था पर भी सवाल खड़े हो गए हैं।
पोस्टमार्टम रिपोर्ट के बाद होगा मौत के कारण का खुलासा
फिलहाल प्रशासन ने मामले की जांच शुरू कर दी है। छात्र की मौत का वास्तविक कारण पोस्टमार्टम रिपोर्ट और चिकित्सकीय जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा। यदि जांच में मलेरिया से मौत की पुष्टि होती है, तो यह दूरस्थ आदिवासी क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं, समय पर इलाज और रेफरल सिस्टम की प्रभावशीलता पर गंभीर सवाल खड़े करेगा।
यह घटना न केवल एक छात्र की असामयिक मौत का मामला है, बल्कि आदिवासी क्षेत्रों के आश्रमों में रह रहे बच्चों की स्वास्थ्य सुरक्षा और निगरानी व्यवस्था की व्यापक समीक्षा की भी मांग करती है।





