बिलासपुर। नगर निगम में पूर्व महापौर के कार्यकाल के दौरान हुए भूमि एवं दुकान आवंटन से जुड़े मामलों की जांच शुरू हो गई है। निगम आयुक्त प्रकाश कुमार सर्वे ने मामले की विस्तृत जांच के लिए चार सदस्यीय समिति का गठन किया है। समिति को सात दिनों के भीतर अपनी रिपोर्ट सौंपने के निर्देश दिए गए हैं। इससे पहले तत्कालीन संपदा अधिकारी राजेश देवांगन को निलंबित किया जा चुका है।

आयुक्त ने जांच समिति को निर्देश दिए हैं कि आवंटन से संबंधित सभी दस्तावेजों, निर्णयों और प्रक्रियाओं की गहन जांच कर तथ्यों के आधार पर रिपोर्ट तैयार की जाए। इस कार्रवाई के बाद निगम कार्यालय में प्रशासनिक हलचल तेज हो गई है।

चार अधिकारियों को सौंपी गई जिम्मेदारी

जांच समिति में संयुक्त संचालक (वित्त) दिनेश निर्मलकर, चीफ इंजीनियर राजकुमार मिश्रा, वर्तमान संपदा अधिकारी अंकुर पांडेय और राजस्व अधिकारी मनीष पात्रे को शामिल किया गया है। समिति वित्तीय अनियमितताओं, दस्तावेजों की जांच और तत्कालीन संपदा अधिकारी के कार्यकाल में लिए गए फैसलों की वैधता का परीक्षण करेगी।

क्या है मामला

नगर निगम को पूर्व महापौर रामशरण यादव के कार्यकाल में संपदा विभाग द्वारा किए गए भूमि आवंटन, एनओसी जारी करने और सरकारी जमीनों के प्रबंधन में अनियमितताओं की शिकायतें मिली थीं। प्रारंभिक जांच में तत्कालीन संपदा अधिकारी राजेश देवांगन की भूमिका संदिग्ध पाए जाने के बाद उनके खिलाफ निलंबन की कार्रवाई की गई। अब पूरे प्रकरण की विस्तृत जांच कर वित्तीय नुकसान और नियमों के उल्लंघन का आकलन किया जाएगा।

व्यापार विहार जमीन मामले की भी होगी जांच

नगर निगम आयुक्त प्रकाश कुमार सर्वे ने कहा कि जांच का दायरा बढ़ाते हुए व्यापार विहार जमीन आवंटन से जुड़े मामलों की भी समीक्षा की जाएगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि सरकारी जमीनों के आवंटन और उपयोग में यदि किसी प्रकार की अनियमितता सामने आती है तो जिम्मेदार लोगों के खिलाफ नियमानुसार सख्त कार्रवाई की जाएगी।

इन बिंदुओं पर रहेगा जांच का फोकस

  • पूर्व महापौर के कार्यकाल में भूमि और दुकानों के आवंटन की फाइलों की जांच।
  • संपदा विभाग द्वारा जारी एनओसी और अन्य प्रशासनिक निर्णयों की समीक्षा।
  • नियमों के विपरीत हुए आवंटनों और संभावित वित्तीय नुकसान का आकलन।
  • व्यापार विहार क्षेत्र में सरकारी जमीनों के आवंटन और उपयोग से जुड़े मामलों की नए सिरे से जांच।

समिति को एक सप्ताह के भीतर पूरी जांच रिपोर्ट निगम आयुक्त को सौंपनी होगी। रिपोर्ट के आधार पर आगे की प्रशासनिक एवं वैधानिक कार्रवाई की जाएगी।

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