रायपुर। राजधानी रायपुर के आउटर इलाकों में अवैध प्लॉटिंग और सरकारी जमीन पर अतिक्रमण की शिकायतें लगातार सामने आ रही हैं। चंगोराभाटा, भाटागांव, डीडी नगर, गोकुल नगर, चौरसिया कॉलोनी, पुराना धमतरी रोड और मोती नगर समेत कमल विहार परियोजना से लगे कई क्षेत्रों में बिना अनुमति प्लॉटिंग किए जाने के आरोप हैं। शिकायतों के बावजूद प्रभावी कार्रवाई नहीं होने से अवैध कारोबार से जुड़े लोगों के हौसले बढ़ने की बात कही जा रही है।
कमल विहार के साथ सकरी, पिरदा, लोहरा, भाटागांव, गोकुल नगर, हजरत बिलाल नगर, बोरियाखुर्द, डुंडा और बिरगांव जैसे इलाकों में भी ऐसी गतिविधियों की शिकायतें सामने आई हैं। आरोप है कि कुछ स्थानों पर सरकारी जमीन और सार्वजनिक रास्तों का इस्तेमाल निजी प्लॉटिंग के लिए किया जा रहा है।
कमल विहार की सड़कों के निजी इस्तेमाल का आरोप
कमल विहार परियोजना में नागरिक सुविधाओं और योजनाबद्ध विकास के लिए बनाई गई सड़कों को कुछ निजी प्लॉट तक पहुंचने के रास्ते के रूप में इस्तेमाल किए जाने की शिकायत है। पूर्व में एक ऐसे रास्ते को बंद किए जाने की बात सामने आई थी, लेकिन स्थानीय स्तर पर इसे दोबारा खोल दिए जाने का दावा किया जा रहा है।
इसके अलावा सरकारी जमीन को निजी प्लॉट की सीमा में शामिल कर अतिक्रमण किए जाने की शिकायतें भी हैं। यदि ऐसे मामलों की पुष्टि होती है तो इससे न केवल सरकारी संपत्ति को नुकसान होगा, बल्कि शहर के नियोजित विकास पर भी असर पड़ सकता है।
राजस्व रिकॉर्ड की भूमिका पर भी सवाल
आरोप है कि आउटर क्षेत्रों में सरकारी घासभूमि, कोटवारी भूमि और अन्य शासकीय जमीनों की जानकारी हासिल कर आसपास की निजी जमीन खरीदी जाती है। इसके बाद सरकारी जमीन को प्लॉटिंग या कॉलोनी के दायरे में शामिल करने की कोशिश की जाती है।
कुछ मामलों में राजस्व विभाग, नगर निगम और टाउन एंड कंट्री प्लानिंग से जुड़े कर्मचारियों की भूमिका को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं। हालांकि इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। ऐसे में जमीन के रिकॉर्ड, नक्शा-खसरा, स्वीकृत लेआउट और वास्तविक सीमांकन की विस्तृत जांच से ही स्थिति स्पष्ट हो सकती है।
करोड़ों की जमीन पर कब्जे की शिकायत
मानसपुरम कॉलोनी के पीछे मठपुरैना खार और चौरसिया कॉलोनी के आसपास भी प्लॉटिंग को लेकर शिकायतें सामने आई हैं। स्थानीय स्तर पर राजनीतिक संरक्षण के आरोप भी लगाए जा रहे हैं। इन दावों की स्वतंत्र या आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
शहर और आउटर क्षेत्र में जमीन की कीमत बढ़ने के कारण सरकारी भूमि पर अतिक्रमण का मामला गंभीर होता जा रहा है। कई जगह किसानों की कृषि भूमि खरीदने के बाद उससे लगी सरकारी जमीन को भी परियोजना में शामिल किए जाने के आरोप हैं।
सरकारी ही नहीं, निजी जमीनों को लेकर भी विवाद
अवैध प्लॉटिंग का मामला केवल सरकारी जमीन तक सीमित नहीं है। निजी जमीन मालिकों की ओर से भी जमीन पर कब्जा और सीमा विवाद की शिकायतें सामने आती रही हैं। आरोप है कि कुछ प्रोजेक्ट में खरीदी गई जमीन के बीच मौजूद सरकारी रास्ते, सड़क या दूसरी शासकीय भूमि को भी निर्माण क्षेत्र में शामिल कर लिया जाता है।
कबीर नगर हाउसिंग बोर्ड, कचना रोड और अन्य क्षेत्रों में भी रास्ते तथा शासकीय भूमि के उपयोग को लेकर पूर्व में सवाल उठते रहे हैं। ऐसे मामलों में स्वीकृत लेआउट और मौके पर वास्तविक निर्माण का मिलान कर उच्चस्तरीय जांच किए जाने की जरूरत बताई जा रही है।
सड्डू समेत आउटर क्षेत्र पर ज्यादा दबाव
सड्डू में नाले और आसपास की जमीन पर अतिक्रमण की शिकायतों ने भी प्रशासन की निगरानी पर सवाल खड़े किए हैं। रायपुर का तेजी से विस्तार होने के कारण गोगांव, गोंदवारा, भनपुरी, सिलतरा और दूसरे आउटर क्षेत्र जमीन कारोबार से जुड़े लोगों के निशाने पर हैं।
पूर्व में इन क्षेत्रों में सरकारी और घास भूमि पर कब्जे तथा अवैध प्लॉटिंग के मामले सामने आने के बाद प्रशासन ने कार्रवाई भी की थी। कई स्थानों पर सरकारी जमीन की सुरक्षा के लिए बाउंड्रीवाल बनाने जैसे कदम उठाए गए।
बिना अनुमति कृषि भूमि पर प्लॉटिंग भी चुनौती
कृषि उपयोग के लिए निर्धारित जमीन पर बिना अनुमति प्लॉट काटकर बेचने का मामला भी प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती है। मास्टर प्लान में कृषि, हरित क्षेत्र या आमोद-प्रमोद के लिए आरक्षित जमीन का उपयोग नियमों के विपरीत कॉलोनी विकसित करने में किए जाने पर संबंधित विभाग कार्रवाई कर सकते हैं।
अवैध कॉलोनी विकसित करने के लिए सरकारी सड़क का उपयोग, शासकीय जमीन पर कब्जा या बिना अनुमति कृषि भूमि का स्वरूप बदलने के मामलों में दस्तावेजों की जांच और सीमांकन अहम है।
जांच से सामने आएगी वास्तविक स्थिति
अवैध प्लॉटिंग और सरकारी जमीन पर कब्जे की लगातार मिल रही शिकायतों के बीच अब राजस्व विभाग, नगर निगम और टाउन एंड कंट्री प्लानिंग की संयुक्त कार्रवाई की आवश्यकता महसूस की जा रही है। संबंधित क्षेत्रों में जमीन का सीमांकन, रिकॉर्ड की जांच और स्वीकृत लेआउट का मौके की स्थिति से मिलान होने पर ही वास्तविक स्थिति सामने आ सकेगी।
यदि जांच में सरकारी जमीन पर कब्जा, अवैध प्लॉटिंग या सार्वजनिक रास्ते के अनधिकृत इस्तेमाल की पुष्टि होती है तो नियमानुसार अतिक्रमण हटाने, अवैध निर्माण पर कार्रवाई और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कानूनी कदम उठाए जा सकते हैं।





