देवास। जिले में यातायात और परिवहन सुविधाओं को बेहतर बनाने के लिए दो महत्वपूर्ण परियोजनाओं पर तेजी से काम चल रहा है। इनमें इंदौर-बैतूल राष्ट्रीय राजमार्ग (फोरलेन) और इंदौर-बुधनी नई रेल लाइन परियोजना शामिल हैं। हालांकि इन विकास कार्यों के लिए बड़ी संख्या में पेड़ों की कटाई और वन भूमि के उपयोग को लेकर पर्यावरणीय चिंताएं भी सामने आ रही हैं।

जानकारी के अनुसार, दोनों परियोजनाओं का एक बड़ा हिस्सा वन क्षेत्र से होकर गुजर रहा है। रेल लाइन परियोजना में जंगलों को सुरक्षित रखने के लिए दो स्थानों पर 10 किलोमीटर से अधिक लंबी सुरंग (टनल) बनाने की योजना है, ताकि वन्य क्षेत्र और जैव विविधता पर कम से कम प्रभाव पड़े। इसके बावजूद परियोजनाओं के लिए हजारों पेड़ों की कटाई की जा रही है।

वन विभाग के आंकड़ों के मुताबिक जिले की चार वन रेंजों में 4 हजार से अधिक पेड़ काटे जाने प्रस्तावित हैं। इनमें सबसे ज्यादा संख्या सागौन (टीक) के पेड़ों की है। इसके अलावा पलाश और अन्य स्थानीय प्रजातियों के पेड़ भी प्रभावित होंगे।

परियोजनाओं के लिए वन भूमि के उपयोग के बदले वन विभाग को राजस्व भूमि उपलब्ध कराई जा रही है। इसके तहत टोंकखुर्द क्षेत्र सहित अन्य स्थानों पर भूमि चिन्हित कर वन विभाग को आवंटित की जा चुकी है। हालांकि अब तक वहां प्रतिपूरक वृक्षारोपण (कम्पेन्सेटरी प्लांटेशन) का कार्य शुरू नहीं हो पाया है।

बताया गया है कि इंदौर-बैतूल फोरलेन परियोजना के लिए लगभग 40 हेक्टेयर वन भूमि और इंदौर-बुधनी रेल लाइन के लिए करीब 45 हेक्टेयर वन भूमि का उपयोग किया जा रहा है। प्रशासन का कहना है कि विकास और पर्यावरण संरक्षण के बीच संतुलन बनाने का प्रयास किया जा रहा है, जबकि पर्यावरणविद् समय पर वृक्षारोपण और वन संरक्षण उपायों को लागू करने की मांग कर रहे हैं।