नई दिल्ली। वैश्विक आर्थिक परिस्थितियों और भू-राजनीतिक घटनाक्रमों के बीच सोना-चांदी के बाजार में लगातार उतार-चढ़ाव देखने को मिल रहा है। पिछले कुछ महीनों से कीमती धातुओं की कीमतों में जारी गिरावट ने सराफा कारोबारियों, निवेशकों और खरीदारों का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है। बाजार में अब इस बात की चर्चा तेज हो गई है कि यदि यही रुझान जारी रहा तो आने वाले समय में चांदी की कीमत 1.70 लाख रुपये प्रति किलोग्राम और सोने का भाव 80 हजार रुपये प्रति 10 ग्राम तक पहुंच सकता है।
करीब छह महीने पहले, जनवरी 2026 में सोना और चांदी ने रिकॉर्ड ऊंचाई को छुआ था। उस समय चांदी का भाव 4 लाख रुपये प्रति किलोग्राम के पार पहुंच गया था, जबकि सोने की कीमत 1.82 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम तक पहुंच गई थी। हालांकि, इसके बाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में आई नरमी और निवेशकों की बदलती रणनीतियों के चलते दोनों धातुओं में लगातार गिरावट दर्ज की गई।
वर्तमान में चांदी का भाव घटकर करीब 2.27 लाख रुपये प्रति किलोग्राम तक पहुंच गया है, जबकि सोना 1.47 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम के आसपास कारोबार कर रहा है। इस गिरावट से जहां निवेशकों में चिंता बढ़ी है, वहीं शादी-विवाह के सीजन और आभूषण खरीदने की योजना बना रहे ग्राहकों के लिए यह राहत की खबर मानी जा रही है।
गिरावट के पीछे ये हैं प्रमुख कारण
विशेषज्ञों के अनुसार, सोना-चांदी की कीमतों में गिरावट के पीछे कई वैश्विक कारण जिम्मेदार हैं—
- अमेरिकी डॉलर की मजबूती।
- अंतरराष्ट्रीय बाजार में निवेशकों का सुरक्षित निवेश से अन्य विकल्पों की ओर रुख।
- वैश्विक ब्याज दरों और मौद्रिक नीतियों में बदलाव।
- भू-राजनीतिक तनाव में कमी आने से सुरक्षित निवेश की मांग कमजोर होना।
- अंतरराष्ट्रीय कमोडिटी बाजार में लगातार उतार-चढ़ाव।
निवेशकों को क्या करना चाहिए?
बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि मौजूदा समय में निवेशकों को जल्दबाजी में निर्णय लेने से बचना चाहिए। यदि कीमतों में गिरावट का सिलसिला जारी रहता है, तो आने वाले महीनों में सोना और चांदी के दाम में और नरमी देखने को मिल सकती है। हालांकि, लंबी अवधि के निवेशकों के लिए यह स्तर खरीदारी का अवसर भी साबित हो सकता है।
फिलहाल बाजार की नजर वैश्विक आर्थिक संकेतकों, अमेरिकी फेडरल रिजर्व की नीतियों और अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रमों पर बनी हुई है, जिनका सीधा असर आने वाले दिनों में सोना और चांदी की कीमतों पर पड़ सकता है।





