सुकमा। छत्तीसगढ़ के सुकमा जिले के कोंटा विकासखंड स्थित ग्राम पंचायत करीगुंडम, जो कभी नक्सली गतिविधियों का गढ़ माना जाता था, अब विकास और बदलाव की नई पहचान बना रहा है। जिला मुख्यालय से लगभग 160 किलोमीटर दूर स्थित यह गांव कभी कुख्यात नक्सली कमांडरों हिड़मा, बारसे देवा और पापाराव के प्रभाव वाले क्षेत्रों में शामिल था। हालांकि सुरक्षा बलों की लगातार कार्रवाई और शासन की विकास योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन के चलते अब यहां हालात तेजी से बदल रहे हैं।


कभी भय और असुरक्षा के माहौल में रहने वाला यह इलाका अब विकास की मुख्यधारा से जुड़ने लगा है। सड़क, शिक्षा, स्वास्थ्य और अन्य मूलभूत सुविधाओं के विस्तार के साथ ग्रामीणों के जीवन में सकारात्मक बदलाव देखने को मिल रहा है। सरकार की विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ भी अब गांव तक पहुंच रहा है।


दुर्गम रास्तों से होकर गांव पहुंचीं दीपिका शोरी


इसी बदलाव को करीब से देखने और ग्रामीणों से सीधा संवाद स्थापित करने के उद्देश्य से छत्तीसगढ़ राज्य महिला आयोग की सदस्य एवं अधिवक्ता दीपिका शोरी दुर्गम और चुनौतीपूर्ण रास्तों का सफर तय कर करीगुंडम पहुंचीं। गांव पहुंचने पर ग्रामीणों ने आदिवासी परंपरा के अनुसार उनका आत्मीय स्वागत किया।


ग्रामीणों के बीच चटाई पर बैठकर सुनी समस्याएं


दीपिका शोरी ने किसी औपचारिक मंच या विशेष व्यवस्था के बजाय ग्रामीणों के बीच जमीन पर बिछी चटाई पर बैठकर महिलाओं, बुजुर्गों और ग्रामीणों से बातचीत की। उन्होंने लोगों की समस्याएं, सुझाव और आवश्यकताओं को गंभीरता से सुना तथा संबंधित मुद्दों के समाधान का भरोसा दिलाया।

उनकी सादगीपूर्ण कार्यशैली और सीधे संवाद की पहल से ग्रामीणों में विश्वास और उत्साह का माहौल देखने को मिला। ग्रामीणों ने भी अपने क्षेत्र में हुए विकास कार्यों के साथ-साथ शिक्षा, स्वास्थ्य, पेयजल, सड़क और रोजगार से जुड़ी आवश्यकताओं को उनके सामने रखा।


विकास के साथ बढ़ रहा लोगों का भरोसा


करीगुंडम में बदलते हालात इस बात का संकेत हैं कि जिन क्षेत्रों को कभी नक्सल प्रभाव के कारण विकास से दूर माना जाता था, वहां अब शासन की योजनाएं और प्रशासन की पहुंच मजबूत हो रही है। स्थानीय लोगों का कहना है कि लगातार विकास कार्यों और सुरक्षा व्यवस्था में सुधार के कारण अब गांव का माहौल पहले की तुलना में काफी बेहतर हुआ है।

महिला आयोग की सदस्य ने कहा कि सरकार का उद्देश्य दूरस्थ और संवेदनशील क्षेत्रों तक विकास की योजनाओं का लाभ पहुंचाना तथा महिलाओं और ग्रामीणों की समस्याओं का समाधान सुनिश्चित करना है। उन्होंने ग्रामीणों को शासन की विभिन्न योजनाओं की जानकारी भी दी और उनका लाभ लेने के लिए जागरूक किया।