रायपुर। छत्तीसगढ़ की खेल प्रतिभाएं अब गांव और जनजातीय अंचलों से निकलकर राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मंच की ओर कदम बढ़ा रही हैं। राज्य सरकार ने खिलाड़ियों की पहचान, प्रशिक्षण, आधुनिक खेल सुविधाओं और रोजगार के अवसरों को जोड़ने के लिए कई योजनाओं पर काम तेज किया है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में मुख्यमंत्री खेल उत्कर्ष मिशन के लिए 100 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है।

बस्तर और सरगुजा में खिलाड़ियों को मिल रहा मंच

राज्य के दूरस्थ और जनजातीय इलाकों में छिपी खेल प्रतिभाओं को सामने लाने के लिए बड़े स्तर पर प्रतियोगिताएं आयोजित की जा रही हैं। बस्तर ओलंपिक में बस्तर संभाग के सात जिलों से अब तक 3.91 लाख से अधिक खिलाड़ियों की भागीदारी का उल्लेख किया गया है। वहीं सरगुजा ओलंपिक के माध्यम से भी स्थानीय युवाओं को अपनी प्रतिभा दिखाने का अवसर मिला है।

खेल विभाग का बजट 304 करोड़ रुपये

वित्तीय वर्ष 2026-27 में खेल एवं युवा कल्याण विभाग के लिए 304 करोड़ रुपये का बजट रखा गया है। इसके अलावा ग्रामीण और विकासखंड स्तर पर खेल गतिविधियों को मजबूत करने के लिए छत्तीसगढ़ क्रीड़ा प्रोत्साहन योजना में 57 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। कुनकुरी, रायगढ़ और रायपुर में स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स विकसित किए जाने की भी जानकारी दी गई है।

नवा रायपुर में बनेगी तीरंदाजी अकादमी

नवा रायपुर में करीब 67 करोड़ रुपये की लागत से तीरंदाजी अकादमी विकसित करने की योजना है। वहीं पंडरापाट क्षेत्र में पहाड़ी कोरवा समुदाय की तीरंदाजी प्रतिभा को निखारने के लिए करीब 18 करोड़ रुपये की अकादमी तैयार किए जाने का उल्लेख है।

666 खिलाड़ियों और प्रशिक्षकों को मिला प्रोत्साहन

राज्य खेल अलंकरण के तहत वर्ष 2026 में 666 खिलाड़ियों और प्रशिक्षकों को 1.74 करोड़ रुपये से अधिक की पुरस्कार एवं प्रोत्साहन राशि दिए जाने की जानकारी सामने आई है। इसके साथ ही 156 उत्कृष्ट खिलाड़ियों के लिए शासकीय सेवा में नियुक्ति की दिशा में भी रास्ता खोलने की बात कही गई है।

हॉकी लीग की तैयारी, 2036 ओलंपिक पर भी नजर

प्रदेश में हॉकी को बढ़ावा देने के लिए राज्य स्तरीय हॉकी लीग की तैयारी की गई है। इसमें छह फ्रेंचाइजी टीमों के साथ स्थानीय खिलाड़ियों को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर के खिलाड़ियों के साथ खेलने का अवसर देने की योजना है। दीर्घकालिक लक्ष्य राज्य से ऐसे खिलाड़ियों को तैयार करना है, जो वर्ष 2036 ओलंपिक जैसे बड़े मंच पर अपनी चुनौती पेश कर सकें।

राज्य सरकार का जोर खिलाड़ियों को शुरुआती स्तर से पहचान कर बेहतर प्रशिक्षण, संसाधन और प्रतियोगी अवसर उपलब्ध कराने पर है। सरकार का कहना है कि खेल युवाओं में अनुशासन, आत्मविश्वास और मेहनत की भावना विकसित करने के साथ रोजगार और करियर के नए अवसर भी पैदा कर सकते हैं।