रायपुर। छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित कथित शराब घोटाला मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने बड़ी कार्रवाई करते हुए कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व कोषाध्यक्ष रामगोपाल अग्रवाल को गिरफ्तार किया है। गिरफ्तारी धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA) के तहत की गई है। अब उन्हें अदालत में पेश किया जा सकता है, जहां ED पूछताछ के लिए रिमांड की मांग कर सकती है।
रामगोपाल अग्रवाल की गिरफ्तारी के बाद प्रदेश की राजनीति में हलचल बढ़ गई है। कथित शराब घोटाले की जांच में पहले भी कई राजनीतिक और प्रशासनिक हस्तियों के नाम सामने आ चुके हैं। ऐसे में ED की इस कार्रवाई को जांच के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
2019 से 2022 के बीच कथित घोटाले की जांच
ED के आरोपों के मुताबिक, छत्तीसगढ़ में 2019 से 2022 के बीच शराब कारोबार से जुड़ी एक कथित संगठित व्यवस्था संचालित की गई थी। एजेंसी का दावा है कि इसमें अधिकारियों और प्रभावशाली लोगों की भूमिका रही।
जांच एजेंसी का आरोप है कि इस व्यवस्था के जरिए शराब कारोबार को प्रभावित कर अवैध कमाई की गई और सरकारी राजस्व को नुकसान पहुंचाया गया। ED ने मामले में करीब 2,883 करोड़ रुपये के कथित घोटाले का दावा किया है। इन आरोपों पर अंतिम निर्णय न्यायिक प्रक्रिया के अधीन है।
वित्तीय लेन-देन को लेकर हो सकती है पूछताछ
रामगोपाल अग्रवाल की गिरफ्तारी के बाद ED कथित शराब घोटाले से जुड़े वित्तीय लेन-देन और उनकी कथित भूमिका के संबंध में पूछताछ कर सकती है।
एजेंसी यह पता लगाने की कोशिश कर सकती है कि कथित अवैध धन के लेन-देन में उनकी कोई भूमिका थी या नहीं और मामले में पहले से जांच के दायरे में आए लोगों के साथ उनके वित्तीय या अन्य संबंध किस तरह के रहे।
अदालत से रिमांड मिलने की स्थिति में ED उनसे मामले से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर विस्तृत पूछताछ कर सकती है।
कई बड़े नाम पहले से जांच के दायरे में
कथित शराब घोटाले की जांच के दौरान कई राजनीतिक और प्रशासनिक हस्तियों के नाम सामने आ चुके हैं। इनमें पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के बेटे चैतन्य बघेल, पूर्व आबकारी मंत्री कवासी लखमा, तत्कालीन आबकारी आयुक्त निरंजन दास, तत्कालीन संयुक्त सचिव अनिल टुटेजा और तत्कालीन मुख्यमंत्री कार्यालय की उप सचिव सौम्या चौरसिया समेत अन्य नाम शामिल रहे हैं।
जांच एजेंसियों की ओर से मामले में आरोपपत्र दाखिल किए जाने के साथ अलग-अलग स्तर पर कार्रवाई की गई है। संबंधित व्यक्तियों पर लगे आरोप न्यायिक परीक्षण के अधीन हैं।
चैतन्य बघेल पर भी हो चुकी है कार्रवाई
कथित शराब घोटाले से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में ED ने जुलाई 2025 में चैतन्य बघेल को गिरफ्तार किया था। इसके बाद यह मामला प्रदेश की राजनीति में लगातार चर्चा में बना रहा।
अब रामगोपाल अग्रवाल की गिरफ्तारी के बाद कथित शराब घोटाले की जांच एक बार फिर राजनीतिक सुर्खियों में आ गई है।
प्रदेश में बढ़ सकती है सियासी बयानबाजी
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता की गिरफ्तारी के बाद प्रदेश में राजनीतिक बयानबाजी तेज होने की संभावना है। कथित शराब घोटाले और केंद्रीय जांच एजेंसियों की कार्रवाई को लेकर सत्तापक्ष और विपक्ष पहले भी आमने-सामने रहे हैं।
अब सभी की नजर रामगोपाल अग्रवाल की अदालत में पेशी, ED की संभावित रिमांड मांग और जांच में आगे होने वाली कार्रवाई पर रहेगी।





