आरंग। छत्तीसगढ़ के आरंग में करीब दो एकड़ बेशकीमती जमीन को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। एक ओर बुजुर्ग महिलाएं उर्मिला बाई और चमेली बाई अपने परिवार के साथ जमीन को पुश्तैनी संपत्ति बताते हुए न्याय की मांग कर रही हैं, वहीं दूसरी ओर आवेदक अरविंद शर्मा ने इसे शासकीय ‘घास मद’ की भूमि बताते हुए नामांतरण रद्द करने की मांग की है।
वर्षों से जमीन पर काबिज होने का दावा
परिवार का कहना है कि यह जमीन उनके पूर्वजों के समय से उनके कब्जे में रही है और इसी के सहारे परिवार खेती-किसानी कर जीवनयापन करता आया है। 80 वर्षीय उर्मिला बाई और 85 वर्षीय चमेली बाई के परिजनों ने आरोप लगाया है कि जमीन को लेकर उन्हें लंबे समय से मानसिक और आर्थिक परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
परिजनों के मुताबिक, उम्र और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के कारण दोनों बुजुर्ग महिलाओं को इलाज और जीवनयापन के लिए पैसों की आवश्यकता है, लेकिन जमीन से जुड़ी कानूनी और दस्तावेजी प्रक्रिया के कारण वे संपत्ति का उपयोग नहीं कर पा रही हैं। परिवार ने दूसरे पक्ष पर दबाव बनाने के आरोप भी लगाए हैं। हालांकि इन आरोपों से आवेदक ने इनकार किया है।
राजस्व रिकॉर्ड को लेकर विवाद
मामले में पुराने और वर्तमान राजस्व अभिलेखों को लेकर भी दोनों पक्षों के बीच विवाद है। रिपोर्ट के अनुसार, करीब 15 एकड़ क्षेत्र की भूमि के अलग-अलग खसरा नंबरों पर कई किसान परिवारों के भूमिस्वामी अधिकार दर्ज हैं। किसानों का कहना है कि वे वर्षों से यहां खेती कर रहे हैं और अब आपत्तियों के कारण उन्हें परेशानी उठानी पड़ रही है।
राजस्व न्यायालय ने याचिका की थी खारिज
आवेदक अरविंद शर्मा ने दावा किया था कि वर्ष 1929 में संबंधित भूमि शासकीय ‘घास मद’ में दर्ज थी और बाद में हुए निजी नामांतरण गलत हैं। मामले की सुनवाई के बाद अनुविभागीय अधिकारी राजस्व, आरंग ने उपलब्ध अभिलेखों के आधार पर याचिका खारिज कर दी। आदेश में उल्लेख किया गया कि वर्ष 1954-55 और 1995-96 से भूमि उर्मिला बाई, चमेली बाई और उनके पूर्वजों के नाम भूमिस्वामी हक में दर्ज रही है।
निष्पक्ष जांच की मांग पर अड़े आवेदक
दूसरी ओर अरविंद शर्मा ने अपने ऊपर लगे आरोपों को गलत बताया है। उनका कहना है कि उन्होंने केवल यह जानकारी मांगी है कि यदि जमीन पहले शासकीय थी तो बाद में उस पर निजी भूमिस्वामी का नाम किस आधार पर दर्ज हुआ। उन्होंने कहा कि प्रशासन से संतोषजनक जवाब मिलने तक वे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग करते रहेंगे।





