खैरागढ़। छत्तीसगढ़ के खैरागढ़-छुईखदान-गंडई जिले के ग्राम पंचायत कुकुरमुड़ा में रविवार को बड़ा हादसा होते-होते टल गया। लंबे समय से जर्जर पंचायत भवन अचानक भरभराकर गिर पड़ा। घटना के समय भवन के अंदर सरपंच और सचिव मौजूद थे। इमारत का एक हिस्सा गिरते ही दोनों खतरे को भांपकर बाहर निकल गए। कुछ ही देर बाद पूरा पंचायत भवन ढह गया। राहत की बात यह रही कि हादसे में किसी के हताहत होने की सूचना नहीं है।
पहले गिरा भवन का हिस्सा, फिर ढह गई पूरी इमारत
जानकारी के मुताबिक, रविवार को पंचायत भवन में सामान्य कामकाज चल रहा था। इसी दौरान भवन का एक हिस्सा अचानक गिरने लगा। अंदर मौजूद सरपंच और सचिव तत्काल बाहर निकल आए। उनके बाहर आने के कुछ ही क्षण बाद पूरी इमारत मलबे में तब्दील हो गई। यदि दोनों समय रहते बाहर नहीं निकलते तो घटना गंभीर रूप ले सकती थी।
मलबे में दबे महत्वपूर्ण सरकारी दस्तावेज
पंचायत भवन गिरने से कार्यालय में रखी कई जरूरी फाइलें और सरकारी रिकॉर्ड मलबे में दब गए हैं। अब मलबा हटाकर दस्तावेजों को सुरक्षित निकालने की कोशिश की जाएगी। इसके बाद ही स्पष्ट हो पाएगा कि कितने रिकॉर्ड सुरक्षित हैं और कितने दस्तावेजों को नुकसान पहुंचा है।
वर्ष 2008 में बना था पंचायत भवन
बताया जा रहा है कि कुकुरमुड़ा पंचायत भवन का निर्माण वर्ष 2008 में हुआ था। करीब 18 साल पुराने भवन की हालत लंबे समय से खराब थी। दीवारों और भवन के अन्य हिस्सों में जर्जरता के संकेत दिखाई दे रहे थे। ग्रामीणों और पंचायत प्रतिनिधियों की ओर से नए भवन की मांग भी की जाती रही, लेकिन वैकल्पिक व्यवस्था नहीं हो सकी।
जर्जर भवन में कामकाज पर उठे सवाल
घटना के बाद पंचायत भवन की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर सवाल खड़े हो गए हैं। जब इमारत की हालत पहले से खराब थी तो वहां नियमित कामकाज क्यों जारी रखा गया? जर्जर भवन की तकनीकी जांच और कर्मचारियों की सुरक्षा के लिए क्या कदम उठाए गए थे, इसे लेकर भी चर्चा शुरू हो गई है।
ग्रामीणों ने अब जल्द से जल्द नए पंचायत भवन की व्यवस्था करने की मांग की है। कुकुरमुड़ा में समय रहते सरपंच और सचिव के बाहर निकलने से बड़ा हादसा टल गया, लेकिन घटना ने जर्जर सरकारी भवनों की समय पर जांच, मरम्मत और वैकल्पिक व्यवस्था की जरूरत को एक बार फिर सामने ला दिया है।




