नई दिल्ली। पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) के आसपास गहराते संकट का असर अब वैश्विक तेल बाजार पर साफ दिखाई देने लगा है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल दर्ज किया गया है, जिससे दुनिया भर के देशों की चिंता बढ़ गई है। हालांकि, राहत की बात यह है कि भारत में फिलहाल पेट्रोल और डीजल के खुदरा दामों में कोई बदलाव नहीं किया गया है।
कच्चे तेल की कीमतों में तेजी
मध्य-पूर्व में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और होर्मुज मार्ग से तेल आपूर्ति प्रभावित होने की आशंका के बीच ब्रेंट क्रूड छह सप्ताह के उच्चतम स्तर पर पहुंच गया। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि हालात जल्द सामान्य नहीं हुए तो वैश्विक ऊर्जा बाजार पर इसका व्यापक असर पड़ सकता है।
भारत में फिलहाल नहीं बढ़े ईंधन के दाम
अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल महंगा होने के बावजूद देश की तेल विपणन कंपनियों ने 23 जुलाई को पेट्रोल और डीजल की कीमतों में कोई बदलाव नहीं किया है। पिछले कई सप्ताह से घरेलू ईंधन दरें स्थिर बनी हुई हैं। हालांकि, यदि कच्चे तेल की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी जारी रहती है तो आने वाले दिनों में इसका असर घरेलू बाजार पर भी पड़ सकता है।
क्यों अहम है होर्मुज जलडमरूमध्य?
होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापार मार्गों में शामिल है। वैश्विक स्तर पर बड़ी मात्रा में कच्चा तेल इसी रास्ते से विभिन्न देशों तक पहुंचता है। इस मार्ग में किसी भी तरह की बाधा या तनाव से तेल आपूर्ति प्रभावित होने का खतरा बढ़ जाता है, जिससे अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतों पर सीधा असर पड़ता है।
आगे क्या?
ऊर्जा विशेषज्ञों का कहना है कि यदि मध्य-पूर्व में तनाव और बढ़ता है तथा तेल आपूर्ति बाधित होती है तो कच्चे तेल की कीमतों में और तेजी देखने को मिल सकती है। ऐसे में भारत समेत तेल आयात करने वाले देशों पर अतिरिक्त आर्थिक दबाव पड़ने की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता।





