गरियाबंद। सड़क हादसे में जान गंवाने वाले व्यक्ति के आश्रित परिवार को न्यायालय के आदेश के बावजूद 9 लाख 71 हजार रुपए का मुआवजा नहीं मिलने का मामला तूल पकड़ गया है। भुगतान में देरी पर न्यायालय ने सख्त रुख अपनाते हुए आदिवासी विकास विभाग के खिलाफ कुर्की वारंट जारी किया है। वारंट लेकर न्यायालय का अमला विभागीय कार्यालय पहुंचा तो अधिकारियों-कर्मचारियों में हड़कंप मच गया।

मामला वर्ष 2022 में हुए एक सड़क हादसे से जुड़ा बताया जा रहा है। हादसे में व्यक्ति की मौत के बाद उसके आश्रितों ने मुआवजे के लिए न्यायालय का दरवाजा खटखटाया था।


कोर्ट ने दिया था 9.71 लाख रुपए देने का आदेश

मामले की सुनवाई के बाद न्यायालय ने मृतक के आश्रित परिवार को 9.71 लाख रुपए मुआवजा देने का आदेश दिया था। इसके बावजूद लंबे समय तक परिवार को राशि नहीं मिली। आदेश का पालन नहीं होने पर न्यायालय ने अब विभाग के खिलाफ कुर्की वारंट जारी कर दिया।


वारंट लेकर विभाग के दफ्तर पहुंचा न्यायालय का अमला

न्यायालय के आदेश के बाद अमला कुर्की वारंट लेकर आदिवासी विकास विभाग के कार्यालय पहुंचा। कुर्की की कार्रवाई की तैयारी होते ही विभाग में हलचल तेज हो गई।

बताया जा रहा है कि विभागीय अधिकारियों और न्यायालय के अमले के बीच चर्चा के बाद फिलहाल कुर्की की कार्रवाई रोक दी गई है।


मुआवजा चुकाने के लिए मिला कुछ दिनों का समय

जानकारी के मुताबिक, विभाग को मुआवजे की राशि जमा करने के लिए कुछ दिनों का समय दिया गया है। इस दौरान मृतक के आश्रित परिवार को निर्धारित मुआवजा दिए जाने की प्रक्रिया पूरी करनी होगी।

फिलहाल विभाग की संपत्ति की कुर्की टल गई है। हालांकि, निर्धारित समय में 9.71 लाख रुपए का भुगतान नहीं किया गया तो कुर्की की कार्रवाई दोबारा शुरू हो सकती है।

न्यायालय की इस कार्रवाई के बाद अब इस बात पर नजर रहेगी कि विभाग तय समय में पीड़ित परिवार को मुआवजे की राशि देता है या मामला एक बार फिर कुर्की की कार्रवाई तक पहुंचता है।