नई दिल्ली : कांग्रेस ने सोमवार को विदेश नीति के मुद्दे पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार पर कड़ा हमला बोला है। कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर विस्तृत बयान जारी करते हुए दावा किया कि मौजूदा सरकार की नीतियों के चलते भारत के समक्ष एक बड़ी भू-राजनीतिक चुनौती उत्पन्न हो गई है।

उन्होंने कहा कि कभी भारत द्वारा वैश्विक स्तर पर अलग-थलग माने जाने वाला पाकिस्तान आज नए क्षेत्रीय और वैश्विक प्रभाव के साथ उभरता दिखाई दे रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि यह स्थिति चीन के साथ उसकी रणनीतिक साझेदारी के कारण और अधिक गंभीर होती जा रही है, जो भारत के लिए चिंता का विषय है।

यह विवाद तब सामने आया जब पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने दावा किया कि अमेरिका और ईरान के बीच एक ऐतिहासिक शांति समझौता हुआ है, जिस पर 19 जून को जिनेवा (स्विट्जरलैंड) में औपचारिक हस्ताक्षर किए जाएंगे।

जयराम रमेश ने अमेरिका और ईरान के बीच तनाव कम करने के इस अंतरिम समझौते का स्वागत करते हुए भारत के राष्ट्रीय हितों को लेकर चिंता भी जताई। उन्होंने कहा कि होर्मुज जलडमरूमध्य के दोबारा खुलने से भारत को राहत मिल सकती है, लेकिन इससे देश की मूल आर्थिक समस्याओं का समाधान नहीं होगा।

कांग्रेस नेता ने आरोप लगाया कि देश की अर्थव्यवस्था पिछले एक वर्ष से अधिक समय से दबाव में है। उन्होंने कहा कि वास्तविक वेतन में ठहराव के कारण मांग कमजोर हुई है, निजी निवेश की गति सुस्त पड़ी है और चीन से बढ़ते आयात ने व्यापार घाटे को रिकॉर्ड स्तर तक पहुंचा दिया है, जिससे एमएसएमई क्षेत्र पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ा है।

उन्होंने यह भी कहा कि जांच एजेंसियों और कर अधिकारियों को दी गई व्यापक शक्तियों ने निवेश माहौल को प्रभावित किया है।

इसके अलावा कांग्रेस ने इजरायल-ईरान संघर्ष को लेकर भी सरकार की विदेश नीति पर सवाल उठाए और कहा कि प्रधानमंत्री मोदी को इजरायल के प्रति अपने रुख पर पुनर्विचार करना चाहिए।

उन्होंने कहा कि भारत की विदेश नीति को संतुलित और राष्ट्रीय हितों पर आधारित होना चाहिए, जो वर्तमान सरकार की नीति में पर्याप्त रूप से दिखाई नहीं देता।