कोरबा। छत्तीसगढ़ के कोरबा जिले में बाल विवाह का एक मामला सामने आया, जहां 13 वर्षीय किशोरी और 15 वर्षीय किशोर का विवाह कराया जा रहा था। विवाह की सभी तैयारियां पूरी हो चुकी थीं और बारात भी पहुंच गई थी। इसी दौरान सूचना मिलने पर महिला एवं बाल विकास विभाग की टीम तथा मानिकपुर चौकी पुलिस मौके पर पहुंची और समय रहते विवाह रुकवा दिया।
जानकारी के अनुसार, चिमनीभठा वार्ड क्रमांक 14 निवासी दोनों नाबालिग एक-दूसरे को जानते थे और परिवारों ने उनकी इच्छा को देखते हुए सामाजिक रीति-रिवाज से विवाह कराने का निर्णय लिया था। घर में मंडप सज चुका था और बारात भी पहुंच गई थी। इसी बीच किसी ने प्रशासन को इसकी जानकारी दे दी।
सूचना मिलते ही महिला एवं बाल विकास विभाग की टीम पुलिस के साथ मौके पर पहुंची। अधिकारियों को देखकर दोनों पक्षों के परिजनों और वहां मौजूद लोगों में हलचल मच गई।
समझाइश के बाद रुका विवाह
महिला एवं बाल विकास विभाग के अधिकारियों ने दोनों परिवारों को बाल विवाह निषेध कानून की जानकारी दी और कम उम्र में विवाह के दुष्परिणामों से अवगत कराया। अधिकारियों की समझाइश और कानूनी प्रावधानों की जानकारी मिलने के बाद दोनों परिवार विवाह रोकने पर सहमत हो गए। इसके बाद किशोर और किशोरी अपने-अपने घर लौट गए।
आंगनबाड़ी स्तर पर नहीं मिली जानकारी
इस मामले में यह भी सामने आया कि संबंधित वार्ड की आंगनबाड़ी कार्यकर्ता और सहायिका को विवाह की तैयारियों की कोई जानकारी नहीं थी।
अधिकारी ने दी जानकारी
महिला एवं बाल विकास अधिकारी बसंत मिंज ने बताया कि बाल विवाह की सूचना मिलते ही विभागीय टीम तत्काल मौके पर पहुंची और पुलिस के सहयोग से विवाह रुकवाया गया। साथ ही दोनों परिवारों और स्थानीय लोगों को बाल विवाह से संबंधित कानून एवं इसके दुष्परिणामों के बारे में जागरूक किया गया।




