रायपुर। छत्तीसगढ़ अब खनिज, इस्पात और सीमेंट जैसे पारंपरिक उद्योगों के साथ हाईटेक मैन्युफैक्चरिंग के क्षेत्र में भी अपनी पहचान मजबूत करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार की नई औद्योगिक नीति के बीच राजनांदगांव में इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग क्लस्टर (EMC 2.0) और मुंगेली जिले में BEML के हैवी अर्थ मूविंग इक्विपमेंट निर्माण संयंत्र का रास्ता साफ हुआ है।
राज्य सरकार के अनुसार, औद्योगिक सुधारों और निवेश प्रोत्साहन के चलते छत्तीसगढ़ को अब तक 8 लाख करोड़ रुपये से अधिक के निवेश प्रस्ताव और एमओयू मिले हैं। सरकार का जोर पारंपरिक उद्योगों के साथ इलेक्ट्रॉनिक्स, सेमीकंडक्टर, इलेक्ट्रिक वाहन और आधुनिक इंजीनियरिंग जैसे क्षेत्रों में निवेश बढ़ाने पर है।
राजनांदगांव में बनेगा दूसरा बड़ा इलेक्ट्रॉनिक्स क्लस्टर
राजनांदगांव जिले के ग्राम पटेवा में प्रस्तावित इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग क्लस्टर (EMC 2.0) को केंद्र सरकार के इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) से अंतिम मंजूरी मिल गई है।
नवा रायपुर में स्थापित इलेक्ट्रॉनिक्स क्लस्टर के बाद यह प्रदेश का दूसरा बड़ा इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग क्लस्टर होगा। केंद्र सरकार ने EMC 2.0 योजना के तहत परियोजना के लिए 210.56 करोड़ रुपये की वित्तीय सहायता स्वीकृत की है।
इस परियोजना से प्रदेश में इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग से जुड़े नए उद्योगों के आने की उम्मीद है।
306.56 एकड़ में विकसित होगा औद्योगिक पार्क
प्रस्तावित इलेक्ट्रॉनिक्स क्लस्टर करीब 306.56 एकड़ क्षेत्र में विकसित किया जाएगा। इसमें लगभग 150.56 एकड़ जमीन औद्योगिक भूखंडों के लिए आरक्षित रहेगी।
उद्योगों को जल्द उत्पादन शुरू करने की सुविधा देने के लिए यहां रेडी-बिल्ट फैक्ट्री और प्लग-एंड-प्ले जैसी व्यवस्थाएं विकसित करने की योजना है। इसके अलावा समर्पित बिजली उपकेंद्र, जलापूर्ति नेटवर्क, आधुनिक वेयरहाउस और लॉजिस्टिक्स से जुड़ी सुविधाएं भी तैयार की जाएंगी।
परियोजना से संबंधित आवश्यक वैधानिक स्वीकृतियां मिलने के बाद अब इसे धरातल पर उतारने की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाएगी।
चार एंकर कंपनियों ने दिखाई रुचि, 365 करोड़ के निवेश का प्रस्ताव
इलेक्ट्रॉनिक्स क्लस्टर को लेकर निवेशकों की रुचि भी सामने आई है। सेमीकंडक्टर, इलेक्ट्रिक वाहन और स्मार्ट इलेक्ट्रॉनिक्स से जुड़ी चार एंकर कंपनियों ने यहां इकाइयां स्थापित करने में दिलचस्पी दिखाई है।
इन कंपनियों की ओर से करीब 365 करोड़ रुपये के प्रारंभिक निवेश प्रस्ताव मिलने की बात कही गई है। नए उद्योग आने से प्रदेश में इलेक्ट्रॉनिक्स और उससे जुड़े सहायक उद्योगों का नेटवर्क विकसित होने की संभावना है।
9 हजार रोजगार के अवसर सृजित होने की उम्मीद
राज्य सरकार का दावा है कि EMC 2.0 परियोजना से करीब 9 हजार रोजगार के अवसर सृजित हो सकते हैं। सरकार स्थानीय युवाओं को इन रोजगार अवसरों से जोड़ने के लिए कौशल प्रशिक्षण और अन्य व्यवस्थाओं पर भी काम करने की बात कह रही है।
क्लस्टर में सेमीकंडक्टर, ईवी कंपोनेंट्स और स्मार्ट इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों से जुड़े उद्योगों के आने से तकनीकी क्षेत्र में रोजगार की संभावनाएं बढ़ सकती हैं।
यह परियोजना केंद्र सरकार के मेक इन इंडिया, डिजिटल इंडिया और आत्मनिर्भर भारत अभियान से भी जुड़ी होगी।
मुंगेली में BEML लगाएगा भारी मशीनरी निर्माण संयंत्र
राजनांदगांव के साथ मुंगेली जिले को भी औद्योगिक क्षेत्र में बड़ी परियोजना मिली है। सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनी भारत अर्थ मूवर्स लिमिटेड (BEML) यहां हैवी अर्थ मूविंग इक्विपमेंट निर्माण संयंत्र स्थापित करने की तैयारी में है।
राज्य मंत्रिपरिषद ने इसके लिए पथरिया तहसील के ग्राम चंद्रगढ़ी में 79.70 एकड़ शासकीय भूमि रियायती दर पर BEML को आवंटित करने के प्रस्ताव को मंजूरी दी है।
संयंत्र स्थापित होने के बाद मुंगेली जिले में बड़े पैमाने पर इंजीनियरिंग और भारी मशीनरी निर्माण से जुड़ी गतिविधियां शुरू होने की उम्मीद है।
पहले रायगढ़ और जांजगीर-चांपा में तलाशी जा रही थी जमीन
BEML की परियोजना के लिए पहले रायगढ़ और जांजगीर-चांपा समेत अन्य क्षेत्रों में उपयुक्त जमीन की संभावनाएं तलाशी जा रही थीं। इसी बीच मुंगेली जिला प्रशासन ने परियोजना के लिए जमीन उपलब्ध कराने की दिशा में पहल की।
कलेक्टर कुन्दन कुमार के मार्गदर्शन में जिला व्यापार एवं उद्योग केंद्र और राजस्व विभाग की संयुक्त टीम ने विभिन्न स्थानों का सर्वे किया। इसके बाद पथरिया तहसील के चंद्रगढ़ी में 79 एकड़ से अधिक शासकीय भूमि को परियोजना के लिए उपयुक्त पाया गया।
नेशनल हाईवे से महज 30 किलोमीटर दूर प्लांट की जमीन
चंद्रगढ़ी में चयनित जमीन की सबसे बड़ी खासियत इसकी कनेक्टिविटी मानी जा रही है। प्रस्तावित स्थल बिलासपुर-रायपुर राष्ट्रीय राजमार्ग से करीब 30 किलोमीटर की दूरी पर है।
इससे संयंत्र तक कच्चा माल पहुंचाने और तैयार भारी मशीनरी के परिवहन में सुविधा मिलने की उम्मीद है। संबंधित विभागों से अनापत्ति प्रमाणपत्र की प्रक्रिया पूरी करने के बाद प्रस्ताव राज्य शासन को भेजा गया, जिसे मंत्रिपरिषद से मंजूरी मिली।
BEML प्लांट से MSME सेक्टर को भी मिलेगा बढ़ावा
BEML संयंत्र का असर केवल एक बड़ी औद्योगिक इकाई तक सीमित रहने की संभावना नहीं है। इसके आसपास छोटे और मध्यम स्तर के सहायक उद्योगों का नेटवर्क भी विकसित हो सकता है।
मशीन और स्पेयर पार्ट्स निर्माण, लॉजिस्टिक्स, ट्रांसपोर्टेशन, मेंटेनेंस, सर्विसिंग और इंजीनियरिंग सेवाओं से जुड़े MSME उद्योगों के लिए नए कारोबारी अवसर पैदा होने की उम्मीद है।
स्थानीय युवाओं को प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार मिलने के साथ तकनीकी प्रशिक्षण और कौशल विकास के अवसर भी मिल सकते हैं।
खनिज आधारित उद्योगों से हाईटेक मैन्युफैक्चरिंग की ओर बढ़ता प्रदेश
छत्तीसगढ़ की औद्योगिक पहचान लंबे समय से कोयला, लौह अयस्क, इस्पात, बिजली और सीमेंट जैसे क्षेत्रों से जुड़ी रही है। अब राज्य सरकार इलेक्ट्रॉनिक्स, सेमीकंडक्टर, ईवी कंपोनेंट्स और भारी इंजीनियरिंग जैसे क्षेत्रों में निवेश बढ़ाकर औद्योगिक आधार का विस्तार करने पर जोर दे रही है।
राजनांदगांव का EMC 2.0 और मुंगेली का BEML संयंत्र इसी दिशा में दो महत्वपूर्ण परियोजनाएं मानी जा रही हैं। इनके समय पर धरातल पर उतरने से राजनांदगांव और मुंगेली के साथ प्रदेश के औद्योगिक और रोजगार परिदृश्य में भी बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है।





