रायपुर। छत्तीसगढ़ में नए शैक्षणिक सत्र 2026-27 की शुरुआत से पहले छात्रावासों और आश्रमों की व्यवस्थाओं को दुरुस्त करने के लिए जिला प्रशासन ने सख्त रुख अपनाया है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के सुशासन, जवाबदेही और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के संकल्प के अनुरूप सुकमा जिला प्रशासन ने छात्रावासों का औचक निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान कई स्थानों पर लापरवाही और अव्यवस्था सामने आने पर संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ तत्काल अनुशासनात्मक कार्रवाई की गई।


औचक निरीक्षण में सामने आईं कई गंभीर खामियां


25 जून को कलेक्टर और सहायक आयुक्त ने जिले के विभिन्न छात्रावासों एवं आश्रमों का औचक निरीक्षण किया। इस दौरान कई संस्थानों में साफ-सफाई की खराब व्यवस्था, अधिकारियों और कर्मचारियों की अनुपस्थिति, विद्यार्थियों के लिए मूलभूत सुविधाओं में कमी तथा संचालन में लापरवाही जैसी गंभीर खामियां पाई गईं।

प्रशासन ने बताया कि इन संस्थानों को पहले भी समीक्षा बैठकों में आवश्यक सुधार के निर्देश दिए गए थे, लेकिन इसके बावजूद व्यवस्थाओं में अपेक्षित सुधार नहीं हुआ। इसे गंभीरता से लेते हुए तत्काल कार्रवाई की गई।


अधीक्षक और कर्मचारियों पर हुई अनुशासनात्मक कार्रवाई


निरीक्षण में मिली अनियमितताओं के आधार पर संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों को निलंबित करने तथा उनके प्रभार से हटाने की कार्रवाई की गई।

कार्रवाई की जद में आने वालों में कन्या आश्रम दुब्बाटोटा की अधीक्षिका सुशीला कवासी, प्री-मैट्रिक बालक छात्रावास दुब्बाटोटा के अधीक्षक पुनेम हिरमा, पोस्ट-मैट्रिक कन्या छात्रावास की अधीक्षिका सविता यादव तथा प्री-मैट्रिक बालक छात्रावास के भोजराज ठाकुर शामिल हैं।

छात्रावासों का संचालन प्रभावित न हो, इसके लिए जिला प्रशासन ने तत्काल वैकल्पिक अधिकारियों को जिम्मेदारी भी सौंप दी है, ताकि विद्यार्थियों की पढ़ाई और दैनिक व्यवस्थाओं पर कोई असर न पड़े।


बच्चों की शिक्षा और सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता


कलेक्टर ने स्पष्ट कहा कि छात्रावासों और आश्रमों में रहने वाले बच्चों की शिक्षा, सुरक्षा, भोजन, स्वास्थ्य और अन्य आवश्यक सुविधाओं के साथ किसी भी प्रकार की लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी। सभी संस्थानों में गुणवत्तापूर्ण और व्यवस्थित व्यवस्था सुनिश्चित करना प्रशासन की सर्वोच्च जिम्मेदारी है।

उन्होंने अधिकारियों को नियमित निरीक्षण करने, व्यवस्थाओं की लगातार निगरानी रखने और किसी भी तरह की शिकायत मिलने पर तत्काल कार्रवाई करने के निर्देश भी दिए।


जवाबदेही तय करने की दिशा में अहम कदम


जिला प्रशासन का मानना है कि इस कार्रवाई से शासकीय छात्रावासों और आश्रमों में अनुशासन और जवाबदेही मजबूत होगी। साथ ही विद्यार्थियों को स्वच्छ, सुरक्षित और बेहतर शैक्षणिक वातावरण उपलब्ध कराने में मदद मिलेगी।

राज्य सरकार का कहना है कि मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में शिक्षा व्यवस्था को मजबूत बनाने, बच्चों के हितों की रक्षा करने और सुशासन को प्रभावी ढंग से लागू करने के लिए लगातार ठोस कदम उठाए जा रहे हैं। छात्रावासों की नियमित निगरानी और लापरवाह अधिकारियों पर कार्रवाई की यह पहल भी उसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।