रायपुर। योग गुरु बाबा रामदेव ने छात्र आंदोलनों, देश की शिक्षा और चिकित्सा व्यवस्था से लेकर राष्ट्रगीत ‘वंदे मातरम’ तक कई मुद्दों पर अपनी बात रखी है। रविवार को रायपुर पहुंचे रामदेव ने कहा कि देश में किसी जाति या धर्म को खतरे में बताने के बजाय बच्चों और युवाओं के भविष्य को लेकर गंभीरता से सोचने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि विरोध और आंदोलन लोकतांत्रिक व्यवस्था का हिस्सा हैं, लेकिन इनमें कम उम्र के बच्चों के इस्तेमाल को उचित नहीं ठहराया जा सकता।
रायपुर एयरपोर्ट पर मीडिया से की बातचीत
बाबा रामदेव भोपाल से देहरादून जा रहे थे, लेकिन देहरादून में खराब मौसम के कारण उन्हें रायपुर में रात्रि विश्राम करना पड़ा। रायपुर एयरपोर्ट पहुंचने पर उन्होंने मीडिया से बातचीत की और शिक्षा, चिकित्सा, रोजगार, छात्र आंदोलन तथा राष्ट्रहित से जुड़े सवालों पर अपनी राय रखी।
‘किसी जाति-धर्म को नहीं, भारतीय बचपन को खतरा’
रामदेव ने कहा कि हिंदू, मुस्लिम, सिख, ईसाई या किसी जाति-वर्ग को खतरे में बताकर समाज में भय का वातावरण नहीं बनाया जाना चाहिए। उनके मुताबिक चिंता बच्चों और युवाओं के भविष्य को लेकर होनी चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ लोग आंदोलनों में कम उम्र के बच्चों को शामिल कर रहे हैं। प्राथमिक कक्षाओं में पढ़ने वाले बच्चों को आंदोलन में उतारने के बजाय उनकी शिक्षा, संस्कार और व्यक्तित्व निर्माण पर ध्यान दिया जाना चाहिए।
उन्होंने यह भी कहा कि संविधान और लोकतंत्र की रक्षा के लिए आंदोलन किए जा सकते हैं, लेकिन देश की शिक्षा और चिकित्सा व्यवस्था से जुड़े गंभीर सवालों का समाधान भी जरूरी है। व्यवस्था व्यक्ति केंद्रित नहीं होनी चाहिए और सुधार के लिए समाज के सभी वर्गों को अपनी जिम्मेदारी निभानी होगी।
शिक्षा व्यवस्था पर भी उठाए सवाल
योग गुरु ने शिक्षा के व्यवसायीकरण पर चिंता जताई। उनका कहना था कि सरकारी व्यवस्था का लाभ लेने वाले लोगों को सरकारी स्कूलों और अस्पतालों की गुणवत्ता सुधारने की दिशा में भी जिम्मेदारी निभानी चाहिए। उन्होंने कहा कि देश की समस्याएं केवल रोजगार तक सीमित नहीं हैं, बल्कि शिक्षा, स्वास्थ्य और पर्यावरण जैसे विषयों पर भी गंभीरता से काम करने की आवश्यकता है।
‘वंदे मातरम पर नहीं होनी चाहिए राजनीति’
राष्ट्रगीत ‘वंदे मातरम’ को लेकर चल रही राजनीतिक बयानबाजी पर रामदेव ने कहा कि उन्होंने संबंधित विवादित वीडियो नहीं देखा है, इसलिए उस पर सीधे टिप्पणी नहीं करेंगे। हालांकि उन्होंने स्पष्ट किया कि ‘वंदे मातरम’, देश की एकता और अखंडता जैसे विषयों पर सभी को एकजुट रहना चाहिए और इन मुद्दों पर राजनीति नहीं होनी चाहिए। उनके मुताबिक राष्ट्रहित सर्वोपरि होना चाहिए।
मोदी सरकार को लेकर भी रखी राय
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्र सरकार की नीतियों पर सवाल के जवाब में रामदेव ने संतुलित दृष्टिकोण अपनाने की बात कही। उन्होंने कहा कि यह अपेक्षा करना उचित नहीं कि केवल एक प्रधानमंत्री देश की हर व्यवस्था को ठीक कर देगा। उनके अनुसार नरेंद्र मोदी की नीतियों से देश में कई सकारात्मक बदलाव हुए हैं, लेकिन यह कहना भी सही नहीं होगा कि देश में हर व्यवस्था पूरी तरह ठीक है। उन्होंने समस्याओं का मूल्यांकन न्यायपूर्ण नजरिए से करने और सुधार के लिए सरकार के साथ समाज की भागीदारी पर जोर दिया।
बाबा रामदेव के इन बयानों के बाद छात्र आंदोलनों में बच्चों की भागीदारी, शिक्षा व्यवस्था और ‘वंदे मातरम’ को लेकर जारी राजनीतिक बहस एक बार फिर चर्चा में आ गई है।




