जगदलपुर। बस्तर संभाग में आदिवासियों और ग्रामीणों की आजीविका का प्रमुख आधार माने जाने वाले 'हरे सोने' तेंदूपत्ता की अनदेखी सामने आई है। जिला मुख्यालय से लगे सरगीपाल गांव के पास सड़क किनारे तेंदूपत्ता से भरी कई बोरियां लावारिस हालत में पड़ी मिलीं। रखरखाव के अभाव में कई बोरियों की सिलाई उधड़ चुकी है, जिससे कीमती तेंदूपत्ते सड़क पर बिखर रहे हैं।

प्राथमिक तौर पर माना जा रहा है कि कुछ दिन पहले तेंदूपत्ता से लदा कोई ट्रक या ट्रेलर इस मार्ग पर दुर्घटनाग्रस्त हुआ होगा। वाहन मालिक वाहन को तो वहां से हटाकर ले गया, लेकिन तेंदूपत्ता से भरी बोरियां सड़क किनारे ही छोड़ दी गईं।

स्थानीय ग्रामीणों ने बताया कि मानसून सक्रिय हो चुका है। यदि इन बोरियों को जल्द सुरक्षित गोदाम तक नहीं पहुंचाया गया तो बारिश और नमी के कारण तेंदूपत्ता खराब हो सकता है, जिससे लाखों रुपये के वनोपज के नुकसान की आशंका है।

ग्रामीणों ने वन विभाग और संबंधित अधिकारियों से तत्काल मौके पर पहुंचकर तेंदूपत्ता की बोरियों को सुरक्षित स्थान पर भिजवाने और पूरे मामले की जांच कराने की मांग की है।