बलरामपुर। जिले के रामानुजगंज विकासखंड में कृषि विभाग की शाकंभरी योजना के तहत कूप निर्माण और पंप वितरण में बड़े पैमाने पर अनियमितता के आरोप सामने आए हैं। ग्राम कमलपुर निवासी उत्तम कुमार मिस्त्री ने कलेक्टर एवं जिला दंडाधिकारी को शिकायत सौंपकर पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच की मांग की है।

शिकायतकर्ता ने वित्तीय वर्ष 2023-24 और 2024-25 में योजना के तहत लाभान्वित बताए गए 46 किसानों की स्वीकृत सूची और भौतिक सत्यापन रिपोर्ट के आधार पर कृषि विभाग के अधिकारियों और एक वेंडर की भूमिका पर सवाल उठाए हैं।


RTI से मिले 104 पन्नों के दस्तावेजों में सामने आई विसंगतियां

उत्तम कुमार मिस्त्री के अनुसार, उन्होंने सूचना का अधिकार के तहत उप संचालक कृषि कार्यालय से योजना से संबंधित 104 पन्नों के दस्तावेज हासिल किए। इन दस्तावेजों की जांच के दौरान कई कथित विसंगतियां सामने आईं।

शिकायत में आरोप लगाया गया है कि रामानुजगंज ब्लॉक के अनिरुद्धपुर, कालिकापुर, भाला सहित कई दूरस्थ गांवों के किसानों के नाम पर पंप खरीदी दिखाई गई है।


सभी किसानों ने एक ही वेंडर से खरीदा पंप?

शिकायतकर्ता का दावा है कि 46 किसानों के भौतिक सत्यापन दस्तावेजों में पंप की खरीद करीब 100 किलोमीटर दूर अंबिकापुर स्थित एक ही फर्म मेसर्स निर्मला इंटरप्राइजेज से दर्शाई गई है।

उन्होंने सवाल उठाया है कि अलग-अलग और दूरस्थ गांवों के इतने अधिक किसानों द्वारा एक ही दुकान से पंप खरीदना संदेह पैदा करता है। इसी आधार पर वेंडर चयन, बिल भुगतान और वास्तविक पंप वितरण की जांच की मांग की गई है।


पुराने कुओं को नया बताने का भी आरोप

शिकायत में यह भी आरोप लगाया गया है कि योजना के तहत जिन कुओं को नया निर्माण बताकर राशि स्वीकृत या भुगतान की गई, उनमें से कुछ कुएं पहले से मौजूद थे। पुराने कुओं को नया निर्माण दिखाकर सरकारी राशि निकालने का आरोप लगाया गया है।

शिकायतकर्ता का कहना है कि यदि मौके पर निष्पक्ष भौतिक सत्यापन कराया जाए तो वास्तविक स्थिति सामने आ सकती है।


46 किसानों के मामलों की दोबारा जांच की मांग

शिकायत में वित्तीय वर्ष 2023-24 और 2024-25 के सभी 46 लाभार्थियों के मामलों की दोबारा जांच कराने की मांग की गई है। इसमें किसानों के बयान, पंप की वास्तविक उपलब्धता, बिल-वाउचर, भुगतान रिकॉर्ड, कूप निर्माण और संबंधित अधिकारियों की भूमिका की जांच शामिल करने की मांग की गई है।


अधिकारियों और वेंडर की भूमिका पर उठे सवाल

शिकायतकर्ता ने आशंका जताई है कि यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो इसमें विभागीय स्तर पर मिलीभगत से इनकार नहीं किया जा सकता। इसलिए पूरे मामले की जांच किसी स्वतंत्र या उच्चस्तरीय टीम से कराने की मांग की गई है।

फिलहाल ये सभी आरोप शिकायत और RTI से प्राप्त दस्तावेजों के आधार पर लगाए गए हैं। प्रशासनिक जांच के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि योजना में वास्तव में कितनी अनियमितता हुई और इसके लिए कौन जिम्मेदार है।