रायपुर। छत्तीसगढ़ में अक्टूबर-नवंबर में प्रस्तावित नगरीय निकाय चुनावों से पहले कांग्रेस में संगठनात्मक हलचल तेज हो गई है। पार्टी से बाहर हुए नेताओं की वापसी की प्रक्रिया आगे बढ़ी है, लेकिन जनता कांग्रेस छत्तीसगढ़ (जे) के कांग्रेस में विलय और डॉ. रेणु जोगी व अमित जोगी की वापसी पर अभी अंतिम फैसला नहीं हो सका है। कांग्रेस की अनुशासन समिति ने इस मामले को फिलहाल लंबित रखा है।


36 नेताओं की वापसी पर हुआ मंथन

कांग्रेस की अनुशासन समिति ने हाल में पार्टी से निष्कासित या अलग हुए 36 नेताओं और कार्यकर्ताओं से जुड़े मामलों पर विचार किया। इनमें कई नेताओं की वापसी की प्रक्रिया आगे बढ़ी है, जबकि डॉ. रेणु जोगी, अमित जोगी और कुछ अन्य नामों पर फैसला बाकी है।


जोगी कांग्रेस का मामला सामान्य वापसी से अलग

जनता कांग्रेस छत्तीसगढ़ (जे) का मामला केवल किसी एक नेता की घर वापसी तक सीमित नहीं है। यहां पूरी पार्टी के कांग्रेस में विलय और उसके पदाधिकारियों व कार्यकर्ताओं को शामिल करने का प्रस्ताव है। इसी वजह से कांग्रेस नेतृत्व इसे अलग स्तर पर विचार कर रहा है।

अनुशासन समिति के अध्यक्ष धनेंद्र साहू ने भी संकेत दिया है कि नए प्रदेश प्रभारी के साथ चर्चा के बाद इस पर आगे फैसला लिया जाएगा।


रेणु जोगी और अमित जोगी पहले दे चुके हैं प्रस्ताव

डॉ. रेणु जोगी और अमित जोगी पहले ही जनता कांग्रेस छत्तीसगढ़ (जे) के कांग्रेस में विलय की इच्छा जता चुके हैं। पार्टी की ओर से औपचारिक प्रस्ताव भी दिया जा चुका है। पुराने पत्र में पार्टी की कोर कमेटी के फैसले के आधार पर विलय और पदाधिकारियों के कांग्रेस में प्रवेश की इच्छा जताई गई थी।


अमित जोगी ने पाटन से भूपेश बघेल के खिलाफ लड़ा था चुनाव

मामला राजनीतिक रूप से इसलिए भी संवेदनशील माना जा रहा है क्योंकि अमित जोगी ने 2023 के विधानसभा चुनाव में पाटन सीट से तत्कालीन मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के खिलाफ चुनाव लड़ा था। इसी राजनीतिक पृष्ठभूमि के कारण उनकी कांग्रेस में वापसी और JCCJ के विलय को लेकर पार्टी के भीतर चर्चा बनी हुई है।


27 सितंबर की बैठक पर टिकी निगाहें

छत्तीसगढ़ कांग्रेस के नए प्रदेश प्रभारी सुखदेव भगत 27 सितंबर को रायपुर दौरे पर आ रहे हैं। उनके दौरे के दौरान प्रदेश पदाधिकारियों के साथ संगठनात्मक बैठक प्रस्तावित है।

इसी बैठक में जोगी कांग्रेस के विलय के प्रस्ताव पर भी चर्चा होने की संभावना है। इसके बाद स्थिति अधिक स्पष्ट हो सकती है।


कौन कर रहा विरोध? अभी तस्वीर साफ नहीं

विलय के विरोध को लेकर राजनीतिक अटकलें जरूर हैं, लेकिन सार्वजनिक रूप से किसी एक कांग्रेस नेता को इस प्रक्रिया को रोकने वाला नहीं बताया गया है। पार्टी के भीतर अलग-अलग मत होने की चर्चा जरूर है, मगर अंतिम निर्णय कांग्रेस नेतृत्व के स्तर पर होना बाकी है।

फिलहाल सभी की नजर 27 सितंबर की बैठक पर है, जहां जोगी कांग्रेस के विलय और रेणु-अमित जोगी की वापसी को लेकर आगे की दिशा तय होने की संभावना है।