होर्मुज संकट के बीच भारत पहुंचीं वेनेजुएला की कार्यवाहक राष्ट्रपति, तेल आपूर्ति बढ़ाने पर हुई अहम चर्चा
वैश्विक ऊर्जा बाजार में बढ़ती अनिश्चितता और होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर बने तनाव के बीच वेनेजुएला की कार्यवाहक राष्ट्रपति डेल्सी रोड्रिगेज ने बुधवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की। दोनों नेताओं के बीच ऊर्जा सहयोग, तेल आपूर्ति और द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत बनाने पर विस्तार से चर्चा हुई।
इससे पहले विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने भी रोड्रिगेज से मुलाकात की। उन्होंने कहा कि भारत-वेनेजुएला संबंधों को मजबूत बनाने में रोड्रिगेज की महत्वपूर्ण भूमिका रही है और प्रधानमंत्री के साथ उनकी वार्ता से दोनों देशों के सहयोग को नई गति मिलेगी।
भारत के लिए अहम बनता जा रहा है वेनेजुएला
ऊर्जा क्षेत्र से जुड़े आंकड़ों के अनुसार, वेनेजुएला भारत के प्रमुख कच्चे तेल आपूर्तिकर्ताओं में तेजी से उभर रहा है। एनर्जी एनालिटिक्स फर्म केप्लर के मुताबिक, मई 2026 में वेनेजुएला भारत का तीसरा सबसे बड़ा तेल सप्लायर बन गया। इस दौरान वेनेजुएला से भारत को होने वाली तेल आपूर्ति अप्रैल की तुलना में करीब 50 प्रतिशत बढ़ी है।
विशेषज्ञों का मानना है कि होर्मुज संकट और पश्चिम एशिया में बढ़ती अस्थिरता के बीच भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए वैकल्पिक स्रोतों पर ध्यान केंद्रित कर रहा है। ऐसे में वेनेजुएला एक महत्वपूर्ण साझेदार के रूप में उभर रहा है।
दुनिया का सबसे बड़ा तेल भंडार
करीब 303 अरब बैरल तेल भंडार के साथ वेनेजुएला दुनिया के सबसे बड़े तेल भंडार वाले देशों में शामिल है। यह भंडार कई प्रमुख तेल उत्पादक देशों से भी अधिक माना जाता है। ऊर्जा विशेषज्ञों का कहना है कि भारत और वेनेजुएला के बीच तेल व्यापार को लेकर आगे बड़े समझौते की संभावना बन सकती है।
भारतीय रिफाइनरियों के लिए फायदेमंद
वेनेजुएला का कच्चा तेल भारी और अधिक सल्फर युक्त होता है, लेकिन भारत की आधुनिक रिफाइनरियां इसे डीजल, जेट फ्यूल और अन्य पेट्रोलियम उत्पादों में बदलने में सक्षम हैं। साथ ही यह अन्य विकल्पों की तुलना में अपेक्षाकृत सस्ता भी पड़ता है, जिससे भारतीय कंपनियों को आर्थिक लाभ मिलता है।
पहले भी रहा है प्रमुख तेल आपूर्तिकर्ता
वेनेजुएला लंबे समय तक भारत के प्रमुख तेल आपूर्तिकर्ताओं में शामिल रहा है। वर्ष 2012 में यह भारत का तीसरा सबसे बड़ा तेल सप्लायर बना था। हालांकि अमेरिकी प्रतिबंधों के कारण दोनों देशों के बीच तेल व्यापार प्रभावित हुआ था, लेकिन अब परिस्थितियां बदलने के साथ ऊर्जा सहयोग फिर से मजबूत होता दिखाई दे रहा है।
डेल्सी रोड्रिगेज इससे पहले भी कई बार भारत का दौरा कर चुकी हैं। फरवरी 2025 में उन्होंने ‘इंडिया एनर्जी वीक’ में हिस्सा लिया था, जहां दोनों देशों के बीच तेल आपूर्ति, रिफाइनिंग सहयोग और ऊर्जा निवेश बढ़ाने पर चर्चा हुई थी।





