नई दिल्ली,। अमेरिका और इजरायल की ओर से ईरान पर किए गए हवाई हमलों के करीब चार महीने बाद वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए राहत की उम्मीद जगी है। स्विट्जरलैंड में हुई वार्ता के बाद दोनों पक्ष 60 दिन के युद्धविराम पर सहमत हुए हैं। समझौते के तहत ईरान के परमाणु कार्यक्रम, आर्थिक प्रतिबंधों में संभावित ढील और रणनीतिक रूप से अहम हॉर्मुज जलडमरूमध्य से जुड़े मुद्दों पर आगे बातचीत का खाका तैयार किया गया है।
विशेषज्ञों का मानना है कि युद्धविराम से वैश्विक बाजारों में स्थिरता लौटने, तेल की कीमतों में नरमी आने और आपूर्ति श्रृंखला पर दबाव कम होने की संभावना है। हालांकि, चार महीने तक चले इस संघर्ष के दौरान रक्षा उद्योग, ऊर्जा कंपनियों, समुद्री परिवहन, बीमा और निवेश बैंकिंग क्षेत्र की कई कंपनियों को उल्लेखनीय आर्थिक लाभ हुआ।
ऊर्जा कंपनियों को मिला सबसे बड़ा फायदा
युद्ध के दौरान हॉर्मुज जलडमरूमध्य में बढ़े तनाव का सीधा असर वैश्विक तेल बाजार पर पड़ा। दुनिया के करीब एक-तिहाई एलएनजी और लगभग 20 प्रतिशत कच्चे तेल का परिवहन इसी समुद्री मार्ग से होता है। सुरक्षा जोखिम बढ़ने के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड की कीमत बढ़कर 126 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई थी। युद्धविराम के बाद यह घटकर करीब 72 डॉलर प्रति बैरल पर आ गई।
इस अवधि में सऊदी अरब की सरकारी तेल कंपनी सऊदी अरामको ने अपनी ईस्ट-वेस्ट पाइपलाइन के जरिए लाल सागर मार्ग से तेल आपूर्ति जारी रखी। कंपनी का पहली तिमाही का मुनाफा बढ़कर 32.5 अरब डॉलर पहुंच गया। वहीं बीपी, शेल और टोटलएनर्जीज जैसी प्रमुख ऊर्जा कंपनियों ने भी बेहतर वित्तीय नतीजे दर्ज किए।
रक्षा कंपनियों के ऑर्डर में बढ़ोतरी
संघर्ष शुरू होने के बाद हथियारों और रक्षा उपकरणों की मांग में तेजी आई। अमेरिका ने रक्षा उत्पादन बढ़ाने के लिए प्रमुख रक्षा कंपनियों के साथ कई दौर की बैठकें कीं और रक्षा बजट में अतिरिक्त 200 अरब डॉलर के खर्च को मंजूरी दी।
इसका असर रक्षा कंपनियों के कारोबार पर भी दिखाई दिया। बोइंग का राजस्व बढ़कर 22.2 अरब डॉलर हो गया, जबकि नॉर्थ्रॉप ग्रुमैन के पास लंबित ऑर्डर 95.6 अरब डॉलर तक पहुंच गए। उद्योग विशेषज्ञों का कहना है कि रक्षा क्षेत्र की अन्य बड़ी कंपनियों को भी नए अनुबंध मिले हैं।
समुद्री परिवहन और बीमा कंपनियों की आय बढ़ी
हॉर्मुज जलडमरूमध्य में बढ़ते सुरक्षा जोखिमों के कारण कई जहाजों को वैकल्पिक मार्ग अपनाने पड़े। इससे समुद्री मालभाड़े में तेज वृद्धि दर्ज की गई। विश्लेषकों के अनुसार, वैश्विक टैंकर संचालन का करीब सात प्रतिशत हिस्सा प्रभावित हुआ।
इस दौरान टैंकर ऑपरेटिंग कंपनियों को अधिक किराया मिला। वहीं युद्ध जोखिम बढ़ने से समुद्री बीमा प्रीमियम भी कई गुना तक बढ़ गया। पहले जहां बीमा प्रीमियम जहाज की कीमत का लगभग 0.25 प्रतिशत था, वहीं संकट के दौरान यह बढ़कर 1.5 से 10 प्रतिशत तक पहुंच गया।
निवेश बैंकों की ट्रेडिंग आय में इजाफा
तेल, विदेशी मुद्रा और बॉन्ड बाजार में बढ़े उतार-चढ़ाव का लाभ वैश्विक निवेश बैंकों को भी मिला। बाजार में ट्रेडिंग गतिविधियां बढ़ने से अमेरिका के छह प्रमुख निवेश बैंकों ने 2026 की पहली तिमाही में संयुक्त रूप से लगभग 48 अरब डॉलर का लाभ दर्ज किया। इनमें जेपी मॉर्गन का शुद्ध लाभ 16.5 अरब डॉलर रहा।
प्रेडिक्शन मार्केट पर उठे सवाल
युद्ध के दौरान ऑनलाइन प्रेडिक्शन प्लेटफॉर्म पॉलीमार्केट और काल्शी पर कुछ संदिग्ध ट्रेडिंग गतिविधियां भी सामने आईं। रिपोर्टों के अनुसार, अमेरिकी प्रशासन की घोषणा से कुछ मिनट पहले बड़ी मात्रा में ऑयल फ्यूचर्स की खरीदारी की गई थी। इसी तरह युद्धविराम की आधिकारिक घोषणा से पहले भी कुछ नए खातों ने बड़े दांव लगाए और भारी लाभ कमाया।
कुछ शोधकर्ताओं ने इन लेन-देन की जांच की आवश्यकता जताई है। हालांकि, इन मामलों में किसी भी तरह की अनियमितता या इनसाइडर ट्रेडिंग की आधिकारिक पुष्टि अभी तक नहीं हुई है।





