रायपुर। छत्तीसगढ़ में औद्योगिक विकास अब केवल नए कारखानों की स्थापना तक सीमित नहीं है। राज्य सरकार निवेश, रोजगार, आधुनिक तकनीक, एमएसएमई और क्षेत्रीय संतुलन को साथ लेकर प्रदेश को विजन 2047 के अनुरूप आत्मनिर्भर और समृद्ध बनाने की दिशा में आगे बढ़ रही है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में निवेशकों के लिए प्रक्रियाओं को सरल बनाने के साथ रोजगार आधारित औद्योगिक विकास पर जोर दिया जा रहा है।

वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री लखन लाल देवांगन के मार्गदर्शन में औद्योगिक विकास नीति के जरिए टेक्सटाइल, फार्मा, लॉजिस्टिक्स, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, डेटा सेंटर, सेमीकंडक्टर और इलेक्ट्रॉनिक्स जैसे क्षेत्रों में निवेश आकर्षित करने की कोशिश की जा रही है। सरकार का प्रमुख लक्ष्य निवेश प्रस्तावों को धरातल पर उतारने के साथ स्थानीय युवाओं के लिए बड़े पैमाने पर रोजगार के अवसर तैयार करना है।

₹235 करोड़ से लगेगी टेक्सटाइल यूनिट, 4,650 लोगों को रोजगार का दावा

प्रदेश में वस्त्र एवं परिधान उद्योग को बढ़ावा देने के लिए नवा रायपुर में आधुनिक टेक्सटाइल पार्क विकसित किया जा रहा है। 25 जून 2026 को वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री लखन लाल देवांगन और आवास एवं पर्यावरण मंत्री ओ.पी. चौधरी ने यहां पहली औद्योगिक इकाई का भूमिपूजन किया।

तमिलनाडु की स्विफ्ट टेक्सटाइल्स प्राइवेट लिमिटेड यहां करीब 235 करोड़ रुपये के निवेश से गारमेंट मैन्युफैक्चरिंग यूनिट स्थापित कर रही है। इस इकाई से करीब 4,650 लोगों के लिए रोजगार के अवसर तैयार होने की संभावना जताई गई है।

3,009 नई औद्योगिक इकाइयां, 50 हजार से ज्यादा प्रत्यक्ष रोजगार

राज्य सरकार के आंकड़ों के अनुसार, बीते ढाई वर्षों में छत्तीसगढ़ को 264 औद्योगिक परियोजनाओं से करीब 8.22 लाख करोड़ रुपये के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए हैं। इन परियोजनाओं से 1.72 लाख से अधिक रोजगार सृजित होने की संभावना बताई गई है।

इनमें से 154 परियोजनाएं निर्माण, भूमि आवंटन या उत्पादन के चरण तक पहुंचने की जानकारी दी गई है। कई इकाइयों में उत्पादन भी शुरू हो चुका है।

इसी अवधि में प्रदेश में 3,009 नई औद्योगिक इकाइयां स्थापित होने और इनके माध्यम से 50,807 लोगों को प्रत्यक्ष रोजगार मिलने की जानकारी दी गई है।

औद्योगिक विकास नीति 2024-30 से निवेश को बढ़ावा

राज्य की औद्योगिक विकास नीति 2024-30 में निवेशकों को आकर्षित करने के लिए कई वित्तीय प्रोत्साहनों का प्रावधान किया गया है। विनिर्माण इकाइयों के लिए 100 प्रतिशत तक और सेवा क्षेत्र के लिए 150 प्रतिशत तक वित्तीय प्रोत्साहन का प्रावधान रखा गया है।

एमएसएमई और सेवा उद्योगों के लिए विशेष लाभ के साथ टेक्सटाइल, लॉजिस्टिक्स, AI और फार्मा जैसे भविष्य के क्षेत्रों को भी प्राथमिकता दी जा रही है।

सरकार स्थानीय युवाओं को रोजगार देने वाले उद्योगों को प्रोत्साहित करने पर जोर दे रही है। इसके साथ ही नवा रायपुर में AI डेटा सेंटर SEZ और सेमीकंडक्टर क्षेत्र से जुड़ी निवेश परियोजनाओं को आगे बढ़ाने की तैयारी है।

150 से ज्यादा सेवाओं वाला सिंगल विंडो सिस्टम

राज्य सरकार ने ईज ऑफ डूइंग बिजनेस को औद्योगिक रणनीति का प्रमुख हिस्सा बनाया है। निवेशकों के लिए 150 से अधिक सेवाओं वाला नया सिंगल विंडो सिस्टम विकसित किया गया है।

इसके अलावा निवेशकों की सहायता के लिए AI आधारित ‘वाणी’ प्रणाली, प्रक्रियाओं के सरलीकरण और 500 से अधिक प्रशासनिक सुधारों के जरिए कारोबार शुरू करने और संचालित करने की प्रक्रिया आसान बनाने का प्रयास किया गया है।

23 नए औद्योगिक क्षेत्र, 15 जिलों में नए कार्यों को मंजूरी

औद्योगिक विकास को केवल रायपुर और बड़े शहरों तक सीमित न रखते हुए अन्य जिलों तक पहुंचाने की योजना पर भी काम किया जा रहा है। इसके तहत राज्य में 23 नए औद्योगिक क्षेत्र विकसित किए गए हैं, जबकि 15 जिलों में 26 नए औद्योगिक कार्यों को स्वीकृति मिलने की जानकारी दी गई है।

सरोरा में प्लास्टिक पार्क और नवा रायपुर में टेक्सटाइल, फार्मा तथा रेडीमेड गारमेंट से संबंधित औद्योगिक सुविधाओं के विकास के जरिए अलग-अलग सेक्टर के लिए विशेष औद्योगिक क्लस्टर तैयार किए जा रहे हैं।

81 एकड़ में विकसित हो रहा आधुनिक टेक्सटाइल पार्क

नवा रायपुर में विकसित किए जा रहे आधुनिक टेक्सटाइल पार्क का क्षेत्रफल करीब 81 एकड़ है। यहां 2,758 वर्गमीटर से लेकर 38,180 वर्गमीटर तक के औद्योगिक भूखंड उपलब्ध कराने की योजना है।

टेक्सटाइल और गारमेंट मैन्युफैक्चरिंग के साथ तकनीकी वस्त्र (Technical Textiles) और इससे जुड़े सहायक उद्योगों को भी यहां स्थापित करने की योजना है। इससे वस्त्र उद्योग की पूरी सप्लाई चेन को प्रदेश में विकसित करने में मदद मिलने की उम्मीद है।

डेटा सेंटर से सेमीकंडक्टर तक निवेश पर नजर

छत्तीसगढ़ अब पारंपरिक उद्योगों के साथ नई अर्थव्यवस्था से जुड़े क्षेत्रों में भी निवेश आकर्षित करने पर ध्यान दे रहा है। टेक्सटाइल के अलावा डेटा सेंटर, आईटी, फार्मास्यूटिकल्स, सेमीकंडक्टर, इलेक्ट्रिकल और इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग जैसे क्षेत्रों को प्राथमिकता दी जा रही है।

सरकार का मानना है कि इन क्षेत्रों में निवेश बढ़ने से प्रदेश में उच्च कौशल आधारित रोजगार के अवसर तैयार होंगे और स्थानीय युवाओं को नई तकनीकों से जुड़ने का मौका मिलेगा।

बस्तर-सरगुजा तक औद्योगिक विस्तार की तैयारी

विजन 2047 के तहत औद्योगिक विकास को क्षेत्रीय रूप से संतुलित बनाने पर भी जोर दिया जा रहा है। सरकार आने वाले वर्षों में बस्तर और सरगुजा जैसे क्षेत्रों में औद्योगिक गतिविधियां बढ़ाने के साथ निर्यात नीति, स्टार्टअप एवं नवाचार नीति, कौशल विकास, इंटर्नशिप और एमएसएमई सशक्तिकरण पर विशेष ध्यान देने की तैयारी कर रही है।

उद्योग मंत्री लखन लाल देवांगन के मुताबिक सरकार का उद्देश्य अधिक से अधिक रोजगार पैदा करना और निवेश प्रस्तावों को तेजी से जमीन पर उतारना है, ताकि स्थानीय युवाओं को इसका सीधा लाभ मिल सके।

रोजगार मांगने वाले नहीं, रोजगार देने वाले बनें युवा

राज्य की औद्योगिक रणनीति में युवाओं को केवल नौकरी उपलब्ध कराने के बजाय उन्हें उद्यमिता से जोड़ने पर भी जोर है। स्टार्टअप, नवाचार, कौशल प्रशिक्षण और एमएसएमई के जरिए युवाओं को अपना व्यवसाय शुरू करने के लिए प्रोत्साहित करने की योजना है।

सरकार का लक्ष्य है कि प्रदेश के युवा रोजगार मांगने वाले ही नहीं, बल्कि रोजगार देने वाले उद्यमी के रूप में भी आगे आएं।

विजन 2047: आत्मनिर्भर और समृद्ध छत्तीसगढ़ का लक्ष्य

छत्तीसगढ़ की औद्योगिक रणनीति में निवेश और उत्पादन बढ़ाने के साथ रोजगार, तकनीक, उद्यमिता और क्षेत्रीय विकास को एक साथ आगे बढ़ाने पर जोर दिया जा रहा है।

विजन 2047 की दिशा में इन योजनाओं को प्रभावी ढंग से धरातल पर उतारना राज्य के लिए महत्वपूर्ण होगा। निवेश प्रस्ताव वास्तविक उद्योगों और स्थायी रोजगार में बदलते हैं तो आने वाले वर्षों में छत्तीसगढ़ देश के प्रमुख औद्योगिक और निवेश केंद्रों में अपनी स्थिति और मजबूत कर सकता है।